देवगुरु बृहस्पति 20 जून 2021 यानी रविवार को 121 दिनों के लिए कुंभ राशि में वक्री होंगे। 18 अक्टूबर को गुरु कुंभ राशि में ही मार्गी होंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों के राशि परिवर्तन को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जब-जब बृहस्पति वक्री, अस्त व अतिचारी रहते हैं तो इसके व्यापक शुभ-अशुभ परिणाम देखने को मिलते हैं। ग्रहों के वक्री होने पर व्यवसाय में उतार-चढ़ाव के साथ राजनीति, कृषि व मौसम पर इसके व्यापक प्रभाव देखने को मिलेंगे।
ज्योतिषाचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि शनि, गुरु की उल्टी चाल के साथ ही 21 व 22 जून को अन्य ग्रहों के राशि परिवर्तन से शुभ-अशुभ स्थितियां निर्मित होंगी। 21 जून को शुक्र का कर्क राशि प्रवेश होगा। 22 जून को चंद्रमा तुला से वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। 22 जून को सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश व 22 जून को बुध मार्गी होंगे। इन ग्रहों की उल्टी सीधी चाल, राशि परिवर्तन से भूमंडल पर व्यापक उतार चढ़ाव राजनीति, मौसम, कृषि, व्यापार, अर्थ व्यवस्था आदि में देखने को मिलेगी।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि ग्रहों की उल्टी सीधी चाल व स्थितियों के चलते विभिन्न राशियों पर भी शुभ-अशुभ प्रभाव देखने को मिलेंगे। मिथुन, सिंह व तुला राशि के जातकों पर ग्रह गोचरीय कृपा बरसेगी तो कर्क,कन्या व मकर राशि के जातकों की परेशानियां बढ़ सकती हैं। शेष राशि के जातकों को राशि परिवर्तन व उल्टी-सीधी चाल के मिले जुले परिणाम होंगे। सितंबर और अक्तूबर में विशेष सावधानी अभी से रखना होगी।