संयुक्त कृषि निदेशक जांच के लिए खंदौली की निजी दुकानों पर गए। यूरिया व अन्य कृषि उपयोगी उर्वरकों की उपलब्धता और बिक्री की जांच की। सभी दुकानदारों को निर्देश दिए कि किसी भी किसान को यूरिया तय सरकारी दर और उसके साथ लगेज जबरदस्ती नहीं दिया जाए।
आगरा में यूरिया की कालाबाजारी और किल्लत की समस्या की गूंज शासन तक पहुंच गई है। बुधवार को लखनऊ से संयुक्त कृषि निदेशक जांच से लिए आगरा पहुंचे। जनपद स्तरीय अधिकारियों के साथ खंदौली, खेरागढ़ और अकोला में सहकारी समिति और निजी उर्वरक की दुकानों पर यूरिया की उपलब्धता जांची। बिक्री रजिस्टर देखे। किसानों से फीडबैक लिया।
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संयुक्त निदेशक कृषि अनिल कुमार यादव सुबह करीब 10 बजे खेरागढ़ पहुंचे। उन्होंने परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत सरसों की फसल का निरीक्षण किया। इसके बाद अकोला पहुंचे वहां निजी उर्वरक की दुकानों पर यूरिया की उपलब्धता की जांच की। इसके बाद सैमरा सहकारी समिति पहुंचे। वहां बिक्री रजिस्टर की जांच की। कालाबाजारी की जांच की। फिर खंदौली की निजी दुकानों पर गए। यूरिया व अन्य कृषि उपयोगी उर्वरकों की उपलब्धता और बिक्री की जांच की। सभी दुकानदारों को निर्देश दिए कि किसी भी किसान को यूरिया तय सरकारी दर और उसके साथ लगेज जबरदस्ती नहीं दिया जाए।
बोर्ड पर रखें खाद की उपलब्धता का रिकार्ड
संयुक्त कृषि निदेशक अनिल कुमार ने उर्वरक लाइसेंस धारकों को दुकान पर बोर्ड लगाकर खाद की उपलब्धता अंकित करने के निर्देश दिए। कहा कि दुकान पर उपलब्ध यूरिया, डीएपी व अन्य खाद के बैग की संख्या को अपडेट करते रहे। उनकी दर भी अंकित करें। उन्होंने कृषि अधिकारी को समय-समय पर निरीक्षण करते रहने के निर्देश दिए। कालाबाजारी करने वालों से शक्ति से निपटने और उनके लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की कार्रवाई के निर्देश दिए।