आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के मुआवजा वितरण में आगरा में भी तमाम निर्देशों को नजरअंदाज किया गया। प्रशासन ने शासन की स्वीकृति के बिना ही तमाम जमीनों के बैनामा करा डाले। इनका मुआवजा भी बांट दिया। बाद में इसकी स्वीकृति ली गई।
प्रशासन ने फतेहाबाद और सदर तहसील के 32 गांवों की जमीन अधिग्रहीत करके नौ अप्रैल 2015 को यूपीडा को सौंपी। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए शासन में बैठे अधिकारियों को एक-एक दिन भारी पड़ रहा था। ऐसे में जिन किसानों से जमीन को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी, उनका सौदा उच्च अधिकारियों की मौखिक सहमति के बाद तय कर दिया गया। बाद में ऑडिट रिपोर्ट में मुआवजा वितरण के दौरान जिन सात गांवों की जमीन के रेट को लेकर आपत्ति की गई थी, उसमें लिंक रोड के सहारे की जमीन के मामले थे। दरअसल, इसी में पूरा खेल हुआ। कृषि भूमि के मुआवजा और लिंक रोड की कृषि भूमि के मुआवजे की दरों में काफी अंतर है। सात गांवों की जमीन इन्हीं लिंक रोडों के सहारे दिखाई गईं। कुछ ऐसे भी किसानों को अतिरिक्त मुआवजा दिया गया, जिनकी कृषि भूमि पर निर्माण था। इन सभी जमीनों की शासन से बाद में अनुमति ली गई।
इन सात गांवों में खरीदी गई थी महंगी जमीन
मेवली खुर्द, बाबरपुर, भरापुरा के अलावा मेवलीकलां के गाटा संख्या 754, 858, 760, 762, 857, 861, 862, 866, 916, 953, उझावली के गाटा संख्या 194, 250, 253, मुटावली के गाटा संख्या 62, 63, 79, 80/2, 84, 85/1 और स्वारा के गाटा संख्या 308, 476/1, 477/1, 486, 1031, 1032, 1033, 1037, 1052 की जमीनें अधिक रेट पर खरीदने का आरोप था।
भूमि अध्याप्ति दफ्तर में खंगाली जा रही फाइलें
एक्सप्रेस-वे के मुआवजा वितरण को लेकर जांच के आदेश के बाद भूमि अध्याप्ति विभाग में इससे जुड़ी फाइलें खंगालना शुरू हो गया है। दरअसल, कर्मचारियों को डर है कि पता नहीं किस दिन कौन सी फाइल तलब कर ली जाए।
ऑडिट की आपत्ति का जवाब दे दिया गया था। कई मामलों में कार्योत्तर स्वीकृति ली गई थी। इसके बारे में शासन को अवगत करा दिया था। इसके अलावा कोई आपत्ति नहीं आई थी।
- नागेंद्र शर्मा, एडीएम भूमि अध्याप्ति
कई किसान अब नहीं देना चाहते जमीन
फतेहाबाद। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के लिए अपनी जमीन देने वाले कई किसान अब और जमीन देने से कतरा रहे हैं। फतेहाबाद के भरापुर निवासी किसान शिवचरण की छह बीघा उपजाऊ जमीन एक्सप्रेस-वे में चली गई। उसका भुगतान भी बैनामा के साथ हो गया। लेकिन सड़क के पास ही कटीले तार लगाने के लिए उससे और जमीन मांगी जा रही है। गांव के ही रामबरन की 10 बीघा जमीन एक्सप्रेस-वे में चली गई। भरापुर निवासी दो भाई जयपाल सिंह और ऊधम सिंह ने बताया की एक्सप्रेस-वे में उनकी जमीन के साथ ही एक अन्य किसान का छह बीघा खेत एक ही नंबर में होने के कारण चला गया। उसका भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। आगे भी जमीन जाने का खतरा मंडरा रहा है। ये सभी अपनी और जमीन नहीं देना चाहते। ग्राम गटपुरा, रूदवाई, भलोखर, नगला लोहिया, नगला मावई, प्रतापपुरा, मोहनपुर सहित कई गांवों में जमीन अधिग्रहण के दौरान विवाद की स्थिति भी सामने आई थी।