कई बार लाशों की नहीं हो पाती है शिनाख्त
केस : 1
एक जून को नगला हरकेस स्थित कुएं में छह साल के बालक की लाश मिली थी। बाद में उसकी शिनाख्त फीरोजाबाद निवासी कनिष्क जैन के रूप में हुई थी।
केस : 2
एक जून को गांव सिकतेरा स्थित कुएं में महिला की लाश मिली थी। वह कई दिन स लापता थी। परिवारीजनों ने उसे ढूंढ निकाला था।
केस : 3
18 मई को एत्मादपुर के मोहल्ला सत्ता में तालाब में कारोबारी हाजी मुईन की सूटकेस मेें लाश फेंकी गई थी। लोगों ने पकड़ने की भी कोशिश की थी।
षड्यंत्र कहीं और होता है। हत्या कहीं और की जाती है। लाश को ठिकाने लगाने के लिए एक ही जगह ‘झरना नाला का जंगल’। दो थानों की सीमा क्षेत्र में आने वाला यह इलाका अपराधियों के लिए काफी मुफीद साबित हो रहा है। एक के बाद एक लाश यहां पर ठिकाने लगाई जा रही हैं।
आगरा-फीरोजाबाद हाईवे के बीच में स्थित एत्मादपुर और एत्माद्दौला की सीमा पर स्थित झरना नाला के जंगल का फायदा अपराधी आसानी से उठा लेते हैं। इसकी एक वजह यहां पर पुलिस की गश्त का न रहना भी है। रात के अंधेरे में हत्या करके लाश फेंकने के बाद हाईवे से आसानी भागा जा सकता है। एक तरफ आगरा तो दूसरी तरफ फीरोजाबाद है। हाजी मुईन की हत्या कर लाश फेंकने का मामला हो या फिर फीरोजाबाद के बालक की हत्या कर लाश को कुएं में फेंकने का मामला। झरना नाला के पास के इलाकों में ही लाशें फेंकी गईं। कई बार शवों की शिनाख्त नहीं हो पाती है।
और भी कई इलाके
खड्वाई नहर, रोहता नगर, फतेहाबाद रोड, फतेहपुरी सीकरी रोड, ग्वालियर रोड पर भी शव मिलते हैं।
लूट भी करते हैं
झरना नाला के जंगल का इलाका बदमाशों के लिए लूट करने की भी जगह बनता जा रहा है। सुनसान होने के कारण वाहन चालकों से लूट के बाद बदमाश आसानी से भाग जाते हैं।