जेपी सभागार में ‘आगरा प्यासा क्यों’ पर वर्कशॉप, दिया पानी बचाने का संदेश
पानी बचाने वाले लोगों को जलाधिकार फाउंडेशन, नेशनल चेंबर ने किया सम्मानित
ताजनगरी के चारों कोनों पर पानी ही पानी है। बारिश भी अच्छी है, लेकिन हम उन्हें सहेज नहीं पा रहे और न ही पानी का प्रबंधन ही कर पा रहे हैं। बारिश का पानी ही बचा लिया जाए तो यमुना से पानी लेने की जरूरत ही न पड़े। रविवार को अंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार में विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘आगरा प्यासा क्यों’ विषय पर वर्कशॉप में यह संदेश दिया गया।
नेशनल चेंबर, जलाधिकार फाउंडेशन और आईटीएचएम द्वारा आयोजित वर्कशॉप में घरों में वर्षा जल संरक्षण पर नेहरू नगर के शिवम गोयल ने बिना बिजली के रेन वाटर हार्वेस्टिंग के तरीके बताए। दिल्ली गेट निवासी चिकित्सक डा. संजीव कुलश्रेष्ठ ने रसोई घर और स्नानागार के पानी को घास केनीचे दो फुट पाइप बिछाकर पौधों के योग्य बनाया।
पदम प्राइड के अंकुर जैन ने जीरो वाटर डिस्चार्ज सिस्टम के बारे में बताया। पेयजल और बाथरूम सप्लाई के लिए अलग अलग पाइप लाइन के बारे में बताया। इंडस्ट्रियल वेस्ट वाटर में डाबर फुटवियर के रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की जानकारी दी गई। भरतपुर हाउस कालोनी में जल संरक्षण का ब्यौरा अध्यक्ष चरनजीत थापर ने दिया। इन सभी को मंच पर सम्मानित किया गया। जलाधिकार फाउंडेशन सचिव अवधेश उपाध्याय ने बताया कि लोगों ने जल संरक्षण के उदाहरण पेश किए हैं। उनकी तरह सभी करने लगे तो पानी की समस्या खत्म हो जाएगी।
मुख्य विकास अधिकारी नागेंद्र प्रताप ने कहा कि आगरा में जल संकट से निपटने के लिए प्रशासन तैयार है। लोगों के सुझाव पर मिलजुल कर काम करेंगे।
चेंबर अध्यक्ष अशोक गोयल, आईटीएचएम निदेशक डा. लवकुश मिश्रा, पूर्व अध्यक्ष सतीश चंद्र गुप्ता, सीताराम अग्रवाल, योगेंद्र सिंघल, अमर मित्तल, मनीष अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
पेंटिंग प्रतियोगिता का परिणाम
वर्कशॉप में पेंटिंग प्रतियोगिता के विजेताओं द्वारा बनाई गई तस्वीरों को लगाया गया। पहली श्रेणी में कक्षा सात तक के विद्यार्थी और दूसरी में कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों के बीच प्रतियोगिता हुई। पहली श्रेणी में अभिनव गुप्ता प्रथम, डौली सिंह द्वितीय, सार्थक बंसल तृतीय स्थान पर रहे। दूसरी श्रेणी में रश्मि वर्मा प्रथम, ईशा फातिमा द्वितीय, अलीशा राघव तृतीय रहीं। सात सांत्वना पुरस्कार भी दिए गए।