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जवाहर बाग हिंसा: पांचवी पुण्यतिथि पर छलका शहीद की पत्नी का दर्द कहा- योगी सरकार से थी उम्मीद पर नहीं मिला न्याय

Thu, 03 Jun 2021 08:46 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा

सार

दो जून को मथुरा के जवाहर बाग में हिंसा हुई थी जिसमें पुलिस विभाग ने दो जाबांज खो दिए थे।
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जवाहर बाग में शहीद मुकुल द्विवेदी की पत्नी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पांच साल पहले जवाहर बाग को उपद्रवियों से कब्जामुक्त कराते हुए शहीद हुए तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी की पांचवीं पुण्यतिथि पर बुधवार को उनकी धर्मपत्नी अर्चना द्विवेदी ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि हमें योगी सरकार से न्याय की उम्मीद थी लेकिन नहीं मिला। नम आंखें और रूंधे गले से कहा कि कि आखिरकार आज तक स्मारक और शहीदों की प्रतिमा क्यों स्थापित नहीं हो पाई हैं। अगर सरकार नहीं कर सकती तो उन्हें स्थल में जगह सौंप दी जाए, वह खुद उस पर स्मारक बना लेंगी।
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नोएडा प्राधिकरण की ओएसडी अर्चना द्विवेदी अपने भाई विनोद कुमार पांडेय और बहनोई सतीश कुमार पांडेय के साथ जवाहर बाग पहुंचीं। यहां पर उन्होंने मुकुल द्विवेदी नवग्रह वाटिका पर तस्वीर के सम्मुख पुष्प अर्पित किए। इस बीच वह उस स्थल पर भी गईं, जहां उनके पति तत्कालीन एसपी सिटी की शहादत हुई थी। साथ ही नक्षत्र वाटिका में उन्होंने शहीद तत्कालीन एचएसओ संतोष यादव को पुष्प अर्पित किए। 

मीडिया से बातचीत में अर्चना ने कहा कि राज्य सरकार ने आज तक इस बाग में न तो उनके पति की प्रतिमा लगाई और न ही मुख्य गेट पर नाम तक लिखा है। सीबीआई जांच में भी अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। डीएम नवनीत सिंह चहल और एसएसपी डॉक्टर गौरव ग्रोवर से मिलकर उन्होंने पत्र सौंपकर जवाहर बाग में शहीद स्थल के रखरखाव की जिम्मेदारी लेने की इच्छा जताई। इस मौके पर स्पेशल डीजीसी (पॉक्सो) अल्का उपमन्यु, ब्रज प्रेस क्लब के अध्यक्ष कमलकांत उपमन्यु एडवोकेट और उपजा के महासचिव पवन नवरत्न ने भी पुष्प अर्पित करके श्रद्धासुमन अर्पित किए।
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जवाहर बाग हिंसा: पांच साल बाद भी शहीद पुलिस अफसरों को नहीं मिल सका न्याय, न 'सम्मान'

 
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जवाहर बाग हिंसा की गूंज ने पूरे देश को हिला दिया था
दो जून-2016 का जवाहर बाग का मंजर देखने वाले आज भी सिहर उठते हैं। कब्जाधारियों को हटाने गए तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसएचओ संतोष यादव समेत पुलिसकर्मियों पर ऐसा हमला किया, जिसमें दोनों अफसर शहीद हो गए थे। इसके अलावा 27 लोगों की जानें तक चली गईं थीं। जवाहर बाग पर कब्जा जमाए बैठे रामवृक्ष यादव और उसके गुर्गों ने यह हमला किया था। इसकी गूंज दिल्ली और लखनऊ तक ही नहीं पूरे देश में पहुंची थी।

जांच सीबीआई को मिली
करीब चार साल पहले सीबीआई को जांच सौंपी गई थी। आज तक देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी इस मामले में चार्जशीट दाखिल तक नहीं कर सकी। शहीद मुकुल द्विवेदी के बहनोई सतीश पांडेय ने कहा कि सोती हुई सरकार आखिर न जाने कब जाएगी। अभी तक शहीद होने के बाद कोई पुरस्कार नहीं दिया गया। सीबीआई के डीआईजी ने डेढ़ वर्ष पूर्व कहा था कि वह तीन माह में जांच का परिणाम दे देंगे, लेकिन आज तक स्थिति ढाक के तीन पात बनी हुई है।
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