हमारे कान्हा का जन्मदिन है साहब। आना तो था ही। पहले जन्मोत्सव देखेंगे फिर नंदोत्सव। आज जो भी है सब कान्हा का ही है। मथुरा पहुंच रहे इन भक्तों को जहां जगह मिल रही है वहीं ठिकाना बना लिया है। राशन साथ लेकर आए हैं। सड़क किनारे चूल्हा बनाया और तैयार कर ली रसोई।
बहराइच से आए मेवाराम कहते हैं कि वह मंगलवार की दोपहर को मथुरा आ गए। रेलवे स्टेशन के पास ही वह और उनके साथी रुके हैं। उन्होंने कहा कि अब तो कान्हा का जन्मोत्सव करने के बाद ही वापस जाएंगे।
संतराम बताते हैं कि वह 3 वर्ष से मथुरा आ रहे हैं। यहां भगवान कृष्ण का जन्म दिवस में शामिल होने के बाद घर को लौट जाते हैं। उन्होंने कहा कि न उन्हें रहने की चिंता है और न भोजन पाने की। कहीं न कहीं भोजन मिल जाता है।
रामफल ने बताया कि यहां के कण कण में कान्हा का वास है। यहां आकर सारी थकान उतर जाती है। कहते हैं कि 24 की रात को कान्हा का जन्मोत्सव मनाने के लिए वह मथुरा नगरी में आए हैं।