जनक नंदनी के हाथों में लगी राम नाम की मेहंदी
आगरा(ब्यूरो)। एक ओर अयोध्या नगरी में प्रभु श्रीराम और तीनों भाइयों को मेहंदी लग रही थी तो वहीं दूसरी ओर जनकपुरी में राजा जनक के घर भी जनक दुलारी सीता के हाथों में राम नाम की मेहंदी सजाई गई। इस दौरान गौरी पूजन भी किया गया। बेटी के हाथ में मेहंदी लगते देख माता सुनयना भावुक हो गई। बधाई गीत गाए गए। विनीता गुप्ता, निमिता गुप्ता, सोहिनी, कंचन, नेहा, वत्सला प्रभाकर, उर्मिला अग्रवाल, महामंत्री बबली जैन, रीता कपूर, आशा अग्रवाल, मिथलेश अग्रवाल, अर्चना सिंघल आदि मौजूद थीं। कार्यक्रम का संचालन नूतन अग्रवाल ने किया। मेहंदी की रस्म के बाद भजन संध्या का आयोजन किया गया। मंजरी शुक्ला ने भजन प्रस्तुत किए।
रघुनंदन श्रीराम के विवाह का उल्लास राजा दशरथ (सुनील अग्रवाल) के कमला नगर स्थिति आवास पर देखने को मिला। यहां परिवार की महिलाओं ने भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के स्वरूपों के हाथों में मेहंदी लगाई। शगुन की मेहंदी सबसे पहले माता कौशल्या (प्रतिमा अग्रवाल) ने चारों भाइयों को लगाई। इस दौरान राजा दशरथ का परिवार, रिश्तेदार और कालोनी वासी बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल रहे।
बधाई गीतों के बीच गोवर्धन से आए बेला बाबा और हरिमोहन दास महाराज भी मौजूद रहे। शाम को जनक पार्क कमला नगर में दशरथ परिवार की ओर भजन संध्या का आयोजन किया गया। इसमें क्षेत्र की महिलाएं शामिल हुई। रामजी की चाल देखो... रामचंद्र कृपाल भजि मन... हल्दी प्रेम से लगाओ, हल्दी रंग निखारे... राम सिया विवाह की घड़ी है कोई मंगल गीत गाओ रे.. और मेहंदी है रचने वाली, हाथों में गहरी लाली... आदि गीतों पर महिलाओं ने नृत्य किया। बृजलता अग्रवाल, बीना रानी, भारती, याचिका अग्रवाल, छाया अग्रवाल, पिंकी अग्रवाल, रानी अग्रवाल, रुचि बंसल, रेखा अग्रवाल, शिवानी अग्रवाल, कमल अग्रवाल, गोपाल बंसल, विपिन अग्रवाल, बृज मोहन अग्रवाल और रामलीला कमेटी के पदाधिकारी मौजूद रहे।
परंपरा को संजोने पर होता है गर्व: प्रदीप शर्मा
आगरा। श्रीराम लीला में प्रभु श्रीराम का अभिनय कर रहे प्रदीप शर्मा का मानना है कि राम केवल नाम नहीं हैं वह हमारी सनातन परंपरा का आधार है। राम की लीला का मंचन हमारे पूर्वजों की धरोहर है। इस परंपरा को संजो कर रखने में गर्व की अनुभूति होती है। जब श्रीराम का स्वरूप हम धारण करते हैं तो एक अद्भुत शक्ति मिलती है। वृंदावन के रहने वाले प्रदीप संस्कृति विद्यालय आचार्य की पढ़ाई कर रहे हैं। पिछले करीब सात वर्षों से वे भगवान राम का पात्र निभा रहे हैं।
स्वामी जी कमी खलती है: कमलेश कुमार
रामलीला में लक्ष्मण का किरदार निभा रहे मूल रूप से कामा (राजस्थान) निवासी कमलेश अपने गुरु पदमश्री स्वामी हरगोविंद जी महाराज को याद करते हैं। कमलेश कहते हैं कि मुझे रामलीला और रास लीला में मंचन करते करीब 15-16 वर्ष हो गए हैं। स्वामी हरगोविंद जी के रहने पर एक अलौकिक शक्ति, ऊर्जा मिलती थी।
घर में भी भरत जैसा हूं मैं: दीपक शुक्ला
चित्रकूट धाम निवासी दीपक शुक्ला रामलीला में भरत का पात्र अदा कर रहे हैं। संस्कृति विद्यालय से शास्त्री की शिक्षा ग्रहण कर रहे दीपक का कहना है कि राम मेरे आदर्श हैं और भरत मेरी प्रेरणा। परिवार में भी हम दो भाई हैं। बढ़े भाई को मैं राम की तरह मानता हूं। रामलीला में पिछले छह वर्ष से मंचन कर रहा हूं। यहां कभी अपने घर की याद नहीं आती है।
पूर्व जन्म का प्रताप है रामलीला का मंचन: राहुल
गोवर्धन निवासी राहुल जोशी को शत्रुघ्न का किरदार निभाने का जिम्मा मिला है। राहुल सबसे छोटे भी हैं। उनका कहना है कि यह मेरे पूर्व जन्मों का प्रताप है कि मुझे राम का काज करने का मौका मिला है। अभी संस्कृत की शिक्षा ग्रहण कर रहा हूं। भविष्य में भी धार्मिक कार्यों से जुड़ा रहूंगा। रामलीला का मंचन जारी रहेगा।