जगदीशपुरा जमीन कांड में आख्या पर लेखपाल के हस्ताक्षर मेल नहीं खा रहे हैं। वहीं कानूनगो के हस्ताक्षर भी नहीं हुए हैं। जिलाधिकारी ने इस संबंध में एसडीएम नवोदिता शर्मा से रिपोर्ट तलब की है।
आगरा के जगदीशपुरा जमीन कांड में एक और नया मोड़ आया है। टहल सिंह के फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र के बाद अब सदर तहसील से जारी वारिसान प्रमाणपत्र भी फर्जी निकला। वारिसान पर कानूनगो के हस्ताक्षर नहीं हैं, लेखपाल के हस्ताक्षर मेल नहीं खा रहे हैं। जिलाधिकारी ने इस संबंध में एसडीएम नवोदिता शर्मा से रिपोर्ट तलब की है।
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फर्जी वारिसान प्रमाणपत्र के आधार पर ही टहल सिंह की पुत्रवधू बनकर उमादेवी के नाम 10 हजार वर्ग गज भूमि का दाखिला-खारिज हुआ था। हालांकि दाखिला पर आपत्तियां आने के बाद इसे निरस्त कर दिया गया। प्रशासन की जांच में वारिसान प्रमाणपत्र फर्जी मिलने से उमा देवी की मुश्किल बढ़ सकती है।
टहल सिंह ने खुद आकर तहसीलदार के समक्ष बयान दर्ज कराए थे। जिसमें उन्होंने उमादेवी से कोई संबंध नहीं होने की बात कही। दूसरी तरफ इस मामले की जांच एसआईटी कर रही है।
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इस मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार जेल में हैं। बिल्डर कमल चौधरी आदि के विरुद्ध डकैती की गंभीर धाराओं में केस दर्ज है। इस मामले में जिलाधिकारी भानु चंद्र गोस्वामी ने बताया कि जांच में वारिसान प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया है, एसडीएम से रिपोर्ट मांगी गई है।