रामलीला कमेटी के अध्यक्ष और विधायक जगन प्रसाद गर्ग विवाद बढ़ता देख अपने बयान से पलट गए हैं। ज्ञात हो, 12 अक्तूबर को अमर उजाला ने शीर्षक ‘परंपराओं के उल्लंघन के लिए जानी जाएगी जनकपुरी’ के नाम से खबर प्रकाशित की थी। उसमें जगन गर्ग ने बयान दिया था कि अगली बार से वह राजा जनक का चरित्र खुद देखेंगे। अब बढ़ते विवाद को देख तीन दिन बाद जगन गर्ग को अपने बयान की सुध आई। उस पर भी सीधे अमर उजाला का सामना नहीं किया। उन्होंने सहजीव रतन को अपना लिखित पत्र दिया। इसमें उन्होंने राजा जनक (सहजीव रतन जैन) के चरित्र पर किसी तरह की टिप्पणी करने से इनकार किया है।
अगले साल राजा जनक के चुनाव के संबंध में दिए गए बयान के बाद जगन गर्ग खुद कठघरे में खड़े हो गए हैं। समझा जाता है कि इस वर्ष जनक बने सहजीव रतन जैन ने इस बयान पर अपनी कड़ी आपत्ति जताई। उसके बाद ही जगन गर्ग को बुधवार को पत्र लिखना पड़ा। सहजीव रतन जैन ने मंगलवार को अमर उजाला से अपनी बात कही। बुधवार को उन्हें पत्रकारों से रूबरू होना था, लेकिन उन्होंने ऐन वक्त पर अपना मन बदल दिया। दोपहर में वह जगन गर्ग के पत्र को लेकर अमर उजाला पहुंचे। जनकपुरी के विवाद में खुद को घसीटे जाने को लेकर वह बेहद आहत थे। उनका कहना था कि बढ़हार के बारे में जो बातें कही गईं, वो ठीक नहीं थीं। उन्होंने 800 लोगों के भोजन की व्यवस्था की थी जबकि जनकपुरी समिति ने भोजन के लिए 1400 कार्ड वितरित कर दिए। इस बारे में उन्हें बताया भी नहीं। ऐसे में अव्यवस्था तो होनी ही थी।
जनक सहजीव रतन को दिए पत्र में जगन गर्ग ने लिखा है कि ‘12 अक्तूबर को अमर उजाला में मेरे नाम से जो वक्तव्य प्रकाशित हुआ है, इस संबंध में मेरा कहना है कि इस वर्ष गांधी नगर में बने राजा जनक सहजीव रतन जैन के चरित्र एवं व्यवहार के संबंध में मेरे द्वारा कोई भी किसी प्रकार की टिप्पणी नहीं की गई है।’ यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि जगन गर्ग ने अगली साल के जनक के चुनाव के बारे में टिप्पणी दी थी।