कैल्शियम की परत जमने से रक्त संचार होता है प्रभावित
डॉ. जैन ने बताया कि धमनी में कैल्शियम की परत जमने से ये संकुचित होने लगती हैं और ब्लॉकेज बन जाते हैं। सोनिक वेब से कैल्शियम को तोड़कर साफ कर एंजियोप्लास्टी के जरिये स्टेंट लगाते हैं। हृदय नली बंद होने पर एंजियोप्लास्टी कर ब्लूनिंग और स्टेंटिंग कर खोला जाता है। जिन मरीजों की नली में कैल्शियम की कठोर परत बन जाती है उसके लिए आईवीएल पद्धति वरदान साबित हो रही है। इससे पथराई हुई नली को साफ भी खोला जा रहा है।
आईवीएल तकनीकी सुरक्षित और कारगर भी
डॉ. जैन ने बताया कि जिन मरीजों की नलिकाओं में कैल्शिफाइड ब्लॉकेज है और बाईपास सर्जरी नहीं की जा सकती, उस स्थिति में आईवीएल तकनीक बेहद कारगर और सुरक्षित है। इससे प्रक्रिया से 80- 90 फीसदी सफलता मिलती है। ये जटिल प्रक्रिया है, जिसे आइवस की निगरानी में ही किया जाना चाहिए। आइवस इमेजिंग पद्धति के इस्तेमाल से बंद हो चुकी खून की नलियों में कैल्शियम कितना हटा, इसकी सटीक जानकारी मिलती है। इस प्रक्रिया से धमनियों को नर्म कर देता है और स्टेंट लगाने के लिए बेहतर बना देता है।