नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) की सख्ती का असर सोमवार को दिखा। ऐसा पहली बार हुआ जब नगर निगम ने ताज टेनरी के पास से ठोस कूड़ा हटवाना शुरू किया। अब तक यहां सिर्फ पालीथिन चुनने भर का काम होता था। एनजीटी ने ताजमहल से 200 मीटर दूर ईस्ट गेट नाला में डंप ठोस कचरे पर उत्तर प्रदेश सरकार और नगर निगम व आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) को कड़ी फटकार लगाई।
एनजीटी ने सोमवार को अपने आदेश में कहा कि दो दिन में यह कचरा साफ न हुआ तो प्रत्येक अधिकारी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। नगर निगम को संभवत: ऐसी सख्ती का अंदेशा था इसीलिए आदेश जारी होने से पहले ही सफाई शुरू करा दी थी। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को डीके जोशी की याचिका पर सुनवाई की। याची की ओर से एडवोकेट राहुल चौधरी और एडवोकेट संजय पांडेय ने दलीलें पेश कीं।
पीठ ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, एडीए और नगर निगम को सफाई के मामले पर चेतावनी जारी की। साथ ही जिले के भीतर यमुना में अपशिष्ट और निर्माण सामग्री का मलबा डालने पर आवासीय कॉलोनियों के आरडब्ल्यूए (रेजीडेंस वेलफेयर एसोसिएशन) प्रेसीडेंट और बिल्डर्स को जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया है।
पीठ ने सभी प्राधिकरणों से दो हफ्तों के भीतर इन आवासीय कॉलोनियों और बिल्डर्स की स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है। इसमें सीवर कनेक्शन, और बिल्डिंग प्लान की अनुमति के साथ एसटीपी या सीईटीपी की व्यवस्था होने न होने का जवाब भी देना होगा। एनजीटी ने यमुना डूब क्षेत्र में निर्माण को लेकर बिल्डर्स के पास पर्यावरण मंजूरी है या नहीं, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल बोर्ड और उत्तर प्रदेश सरकार को अगली सुनवाई में यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।