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Agra University: विश्वविद्यालय पहुंची STF, पूर्व कार्यवाहक कुलपति के कार्यकाल में हुए भुगतान की ली जानकारी

Mon, 31 Oct 2022 05:14 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में सोमवार को एसटीएफ ने कर्मचारियों से पूछताछ की। एसटीएफ बीएएमएस और एमबीबीएस की कॉपियां बदलने से लेकर भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामलों की जांच कर रही है।
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एसटीएफ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पूर्व कार्यवाहक कुलपति विनय पाठक के खिलाफ लखनऊ के इंदिरा नगर थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद एसटीएफ ने अपनी जांच और तेज कर दी है। सोमवार को आगरा यूनिट की टीम ने विश्वविद्यालय में छानबीन की। कुलपति सचिवालय में कर्मचारियों से दो घटे तक पूछताछ की। पूर्व कुलपति के कार्यकाल में हुए भुगतान, संबद्धता और मान्यता के संबंध में जानकारी जुटाई है।
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 एसटीएफ के आने से खलबली मच गई। अब लखनऊ एसटीएफ की टीम भी आ सकती है। कई विश्वविद्यालय में परीक्षा संचालन का जिम्मा संभालने वाली कंपनी डिजीटेक्स टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के एमडी डेविड मारियो डेनिस ने लखनऊ के इंदिरा नगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। इसमें डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पूर्व कार्यवाहक कुलपति एवं छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के वर्तमान कुलपति प्रो. विनय पाठक और उनके करीबी एक्सएलआईसीटी कंपनी के मालिक अजय मिश्र को नामजद किया है। 

एसटीएफ ने अजय मिश्र को गिरफ्तार किया था। मुकदमे में आरोप है कि प्रो. विनय पाठक ने पुराने बिल का भुगतान कराने के नाम पर रिश्वत मांगी और धमकाया। कई बार कमीशन के रूप में 1.41 करोड़ रुपये अजय मिश्र को दे चुके हैं। आगरा विश्वविद्यालय में काम करने के लिए फिर दस लाख रुपये की मांग की। मना करने पर जान से मारने की धमकी दी और आगे काम न मिलने की चेतावनी दी। अवैध वसूली और धमकाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। इसकी जांच एसटीएफ कर रही है। 
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कुलपति सचिवालय में कर्मचारियों से दो घंटे तक पूछताछ

लखनऊ में मुकदमा दर्ज होने के बाद सोमवार को एसटीएफ आगरा यूनिट की टीम विश्वविद्यालय पहुंच गई। टीम ने प्रो. विनय पाठक के कार्यकाल में हुए भुगतान की जानकारी मांगी। कुलपति सचिवालय भी गई। वहां पर कर्मचारियों से दो घंटे तक पूछताछ की। कार्यालय में कई फाइलों को खंगाला। महत्वपूर्ण जानकारी ली। भुगतान से संबंधित सभी रिकॉर्ड देने के लिए कहा गया है। टीम के आने से कर्मचारियों में खलबली मच गई।

इनकी होगी जांच

- कार्यवाहक कुलपति प्रो. विनय पाठक जनवरी 2022 से 29 सितंबर तक विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति रहे है। इस दौरान हुए भुगतान की जानकारी जुटाई है। 
- कार्यवाहक कुलपति ने खंदारी कैंपस में बने शिवाजी मंडपम के बनने पर कई भुगतान किए हैं। इसकी जानकारी मांगी गई है। कब, किसको और कितना भुगतान किया गया।
- बाग फरजाना में बने संस्कृति भवन में मंगाए गए फर्नीचर, विज्ञापन पर खर्च रकम और अन्य खर्च की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।
- दोनों भवन को तैयार कराने में करोड़ों खर्च हुए। तय बजट से अधिक का खर्च किया गया है। इससे संबंधित जानकारी मांगी है।
- कार्यवाहक कुलपति के कार्यकाल में अलीगढ़ के कालेजों सहित अन्य की मान्यता और संबद्धता कब और किस प्रक्रिया के आधार पर हुई।
- डिजी लॉकर के लिए अजय मिश्र को कितने पैसे दिए गए, इसके लिए कोई टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई या नहीं।
- कॉपियों को स्कैन का काम करने वाले आदर्श पाठक को कितनी रकम का भुगतान किया गया, यह कब तक किया गया।
- पूर्व में हुए भ्रष्टाचार की शिकायतों के भी दस्तावेज देखे जा रहे हैं।

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एसटीएफ ने रिकॉर्ड मांगा

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में हुए भ्रष्टाचार के कई मामलों की जांच एसटीएफ कर रही है। इसके संबंध में रिकॉर्ड मांगा गया है। लखनऊ में दर्ज मुकदमे की जांच भी की जा रही है। इसके लिए अलग से टीम आएगी। विश्वविद्यालय के कर्मचारियों से टीम लगातार पूछताछ कर रही है। भुगतान, मान्यता और संबद्धता के संबंध मेें जानकारी ली जा रही है।  - राकेश कुमार, एसपी, एसटीएफ, आगरा यूनिट
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एसटीएफ को मिल रही हैं शिकायतें

27 अगस्त को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की बीएएमएस की कॉपियां बदलने का प्रकरण सामने आया था। पुलिस ने कॉपियां ले जाने वाले टेंपो चालक को पकड़ा। बाद में दिल्ली से एक छात्र को पकड़ा गया। इसमें 16 छात्रों की कॉपियां बदलने का मामला सामने आया था। इसके बाद एमबीबीएस के 26 छात्रों की कॉपियां बदली होने के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया। तीनों मुकदमे थाना हरीपर्वत में दर्ज किए गए। एसएसपी की ओर से गठित एसआईटी का नेतृत्व एसपी सिटी विकास कुमार कर रहे हैं। मामले में छात्र नेता राहुल पाराशर ने कोर्ट में समर्पण किया था। पुलिस ने विश्वविद्यालय के तीन कर्मचारी सहित चार को जेल भेजा था। अब तक नौ आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। इस मामले में निचले कर्मचारियों की गिरफ्तारी हुई। जिम्मेदार अब तक पुलिस की पकड़ से दूर हैं। इस मामले की जांच एसटीएफ को दी गई। एसटीएफ ने अपना अस्थायी कार्यालय बनाया। मोबाइल, डाट नंबर और ईमेल आईडी जारी करके लोगों से शिकायत भेजने को कहा था। इसके बाद एसटीएफ को शिकायतों में गोपनीय जानकारियां मिल रही हैं।
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