मैनपुरी। अंकपत्र की द्वितीय प्रति लगाकर नौकरी प्राप्त करने वाले शिक्षकों पर अब शासन की नजर है। संभावना जताई जा रही है कि द्वितीय प्रति के अंकों में फर्जीवाड़ा किया गया है। विशेष सचिव ने प्रदेश स्तर पर चल रही एक जांच के तहत कुछ शिक्षकों की सूची तलब की है। इनके फर्जी होने का उन्होंने आशंका जताई है।
बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की नियुक्ति में अनियमितताएं सामने आती रहीं हैं। मैनपुरी के लिए भी ये कोई नई बात नहीं है। अभी जहां पहले से ही फर्जी शिक्षकों का मामला गर्म है तो वहीं शासन सचिव आनंद कुमार सिंह ने बीएसए को पत्र भेजकर कुछ शिक्षकों की सूची मांगी है।
उन्होंने कहा है कि प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति में बड़े पैमाने पर प्रदेश भर में फर्जीवाड़ा हुआ है। इसकी एसटीएफ जांच कर रही है। जांच के लिए उन्होंने ऐसे शिक्षकों की सूची मांगी है, जिन्होंने हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक, परास्नातक या अन्य कोई भी अंकपत्र की द्वितीय प्रति नियुक्ति के दौरान लगाई है।
इतना ही नहीं लेखाधिकारी कार्यालय में पैन नंबर बदलवाने वाले और आवेदन करने वाले शिक्षकों की सूची भी मांगी गई है।
इससे साफ है कि कहीं न कहीं शक की सुई इन्हीं शिक्षकों पर घूम रही है। उन्होंने एक सप्ताह के अंदर पुलिस महानिरीक्षक एसटीएफ और शासन को सूची उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं।
आदेश आने के बाद विभाग शिक्षकों का डाटा खंगालने में जुट गया है। ऐसे में कहीं न कहीं मैनपुरी में फर्जी शिक्षकों की संख्या बढने की आशंका है। आदेश आने के बाद विभागीय अधिकारी और शिक्षकों की भी नींद उड़ गई है। हालांकि अब तक कोई भी सूचना सार्वजनिक नहीं की गई है।
मैनपुरी में पहले से ही 81 फर्जी शिक्षकों को चिह्नित किया जा चुका है। ये वे शिक्षक हैं, जिन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्ववविद्यालय आगरा से वर्ष 2004 में फर्जी डिग्री ली है। इनमें से कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं, जिन्होंने मेरिट के चक्कर में अपने नंबर बढ़वाए थे।
एसआईटी जांच में फर्जीवाड़ा खुलने के बाद इन्हें हटाने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए इन्हें बर्खास्तगी नोटिस भी जारी हो चुके हैं, लेकिन अब तक इनकी बर्खास्तगी नहीं हो सकी।
जिले में फर्जी शिक्षक मिलने का सिलसिला सालों से चला आ रहा है। दो साल पहले ही तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी रामकरन यादव ने नवनियुक्त शिक्षकों के अभिलेखों की ऑफलाइन जांच कराई थी। जांच में 31 शिक्षकों के अभिलेख फर्जी मिले थे, इन सभी शिक्षकों को उन्होंने निलंबित कर एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी।
एक सप्ताह पहले ही इन शिक्षकों से 4.15 करोड़ की रिकवरी का आदेश जारी हो चुका है।
शासन से जो जानकारी मांगी गई है, उसका डाटा जुटाया जा रहा है। जल्द ही सूचना भेज दी जाएगी, जब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो जाता है तब तक किसी भी शिक्षक की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी।
विजय प्रताप, बीएसए, मैनपुरी।