महिला दिवस: 62 की उम्र में साइकिल से घर-घर दूध पहुंचातीं शीला बुआ
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दो भैंस खरीदकर किया था काम शुरू
शीला बुआ ने परिस्थितियों को मात देने के लिए पशुपालन के लिए दो भैंस खरीदीं। पशुओं की देखभाल के साथ ही अपना जीवन व्यतीत करने की ठान ली। भैंसों के दूध से उन्होंने काम शुरू किया। शीला बुआ ने दूध गांव में बेचने के बजाए समीप के कस्बों में बेचने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने साइकिल से दूध का वितरण शुरू कर दिया। इस मेहनत के साथ उन्हें कुछ अतिरिक्त मुनाफा भी होने लगा। इसके बाद उन्होंने गांव के अन्य पशुपालकों से दूध खरीदकर कस्बे में बेचने का सिलसिला शुरू किया। जिससे उनकी अधिक आमदनी होने लगी। उन्होंने अपने जीवन को संवारना शुरू कर दिया।
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उम्र की सीमाओं को छोड़ा पीछे
62 वर्ष की उम्र में भी वह रोज सुबह चार बजे उठकर पशुओं का काम निपटाती हैं और दूध एकत्रित करके साइकिल से दूध बेचने के लिए निकल जाती हैं। उनका आत्मनिर्भर होने का मन लोगों की जुबां पर रहता है। अब वह अपने पक्के घर में रहती हैं। पशुओं की देखभाल करती हैं और खेती का कार्य भी। उनका कहना है कि हर व्यक्ति को मजबूत इरादे के साथ काम करना चाहिए तो सफलता अवश्य मिलेगी। काम में ईमानदारी और लग्न भी जरूरी है।