फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

International Booker Prize: अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतने वाली गीतांजलि श्री का मैनपुरी से है गहरा नाता, जानें जीवन से जुड़ी कुछ बातें 

Fri, 27 May 2022 12:45 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी

सार

अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार -2022 मैनपुरी की मूल निवासी लेखिका गीतांजलि श्री के नाम रहा। इसके साथ ही गीतांजलि श्री अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं।
विज्ञापन
गीतांजलि श्री को मिला अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गीतांजलि श्री को अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर जिले में हर्ष का माहौल है। लेखिका गीतांजलिश्री का मैनपुरी से पुराना नाता रहा है। उनका जन्म 12 जून 1957 को मैनपुरी में हुआ था। लेखिका गीतांजलि श्री के पिता अनिरुद्घ पांडेय सिविल सेवा में थे। उनके जन्म के दौरान उनकी तैनाती मैनपुरी में बतौर कलेक्टर के पद पर थी। बचपन के दो साल का समय उन्होंने मैनपुरी में गुजारा। इसके बाद उनके पिता का स्थानांतरण हो गया और वे फिर कभी लौटकर मैनपुरी नहीं आईं। गीतांजलि श्री बताती हैं कि उन्हें तो मैनपुरी के संबंध में कुछ याद नहीं हैं, लेकिन उनकी मां श्री पांडेय ने उन्हें जो बताया वह आज भी याद है। वे कहती हैं कि मेरा सौभाग्य है कि मैनपुरी से मेरा जुड़ाव रहा है।

विज्ञापन


बता दें 'टॉम्ब ऑफ सैंड' विश्व के उन 13 पुस्तकों में शामिल थी, जिसे अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार के लिए लिस्ट में शामिल किया गया था। 'टॉम्ब ऑफ सैंड' प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतने वाली किसी भी भारतीय भाषा की पहली किताब बन गई है।

तीन उपन्यास और कई कथा संग्रह लिखे 

गीतांजलि श्री ने तीन उपन्यास और कई कथा संग्रह लिखे हैं। उनकी कृतियों का अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, सर्बियन और कोरियन भाषाओं में अनुवाद हुआ है। वहीं गीतांजलि श्री अब दिल्ली में रहती हैं और उनकी उम्र  64 साल है। उनकी अनुवादक डेजी रॉकवेल एक पेंटर एवं लेखिका हैं जो अमेरिका में रहती हैं। उन्होंने हिंदी और उर्दू की कई साहित्यिक कृतियों का अनुवाद किया है। 

क्या है बुकर पुरस्कार

बुकर पुरस्कार इंग्लैंड द्वारा लेखन के क्षेत्र में दिया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार है। इसकी स्थापना सन 1969 में इंग्लैंड की बुकर मैकोनल कंपनी द्वारा की गई थी। इसमें 50 हजार पाउंड की राशि लेखक को दी जाती है। पुरस्कार के लिए पहले उपन्यासों की सूची तैयार की जाती है और फिर पुरस्कार वाले दिन की शाम के भोज में पुरस्कार विजेता की घोषणा की जाती है। पहला बुकर पुरस्कार अलबानिया के उपन्यासकार इस्माइल कादरे को मिला था।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें