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एकता की जुबां, जायका आजादी का

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जायका अाजादी का - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो
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 भाषा, संस्कृति, रीति-रिवाज के साथ ही भारतीय भोजन में विविधता है। पकाने-परोसने के तरीके भी।  जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल तक, नागालैंड से गुजरात तक हर राज्य की रसोई से उठने वाली सुगंध को अमर उजाला ने द गोरमे क्लब के सहयोग से ‘मां तुझे प्रणाम’ के तहत ‘जायका आजादी का’ में पेश किया। रेनबो हास्पिटल के सभागार में देश का जायका हर जुबां पर चढ़ा। देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के व्यंजन भारतीय थाली के रूप में प्रदर्शित किया गया। इन्हें प्रस्तुत करने वाली द गोरमे क्लब की सदस्यों ने परिधान भी उसी राज्य के धारण किए।
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देशभक्ति के रंग में रंगे ‘मां तुझे प्रणाम’ की कड़ी में शुक्रवार को ‘जायका आजादी का’ कार्यक्रम का उदघाटन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के क्षेत्रीय आयुक्त विश्वजीत सागर, उनकी धर्मपत्नी और बाल मनोविज्ञानी गुड्डी सागर, एसपी सिटी सुशील घुले, रेनबो हास्पिटल के संचालक डा. नरेंद्र मल्होत्रा और द गोरमे क्लब अध्यक्ष रेनुका डंग ने भारत माता के चित्र पर दीप जलाकर किया। अतिथियों ने इस कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही भारतीय थाली का अनावरण किया। द गोरमे क्लब की करीब 50 सदस्यों ने 29 राज्यों के व्यंजनों को इस थाली में न केवल स्थान दिया, बल्कि उसे पकाने की विधि भी प्रदर्शित की। उद्यमी डा. रंजना बंसल, डा. आरसी मिश्रा, डा. अनूप खरे भी मंचासीन रहे।  

‘भारतीय थाली’ की हर डिश निराली
एक ही थाली में 58 से ज्यादा व्यंजनों की खुशबू खास थी। बिहार का लिटटी चोखा हो या गुजराती खमन ढोकला या फिर त्रिपुरा का पंचफोरन, हर एक का जायकेदार स्वाद भी उपस्थितजनों ने चखा।  रेनू भगत ने थाली को आकर्षक ढंग से सजाया। कई तरह के पापड़ और अचार के साथ यह निराली थाली आकर्षण का केंद्र रही और सेल्फी भी सबसे ज्यादा इसी के साथ लिए गए।
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यह मंच की उस फोटो के साथ लगा सकते हैं जिसमें रंजना बंसल बोल रही हैं
जुबां पर आई पेट की बात
क्षेत्रीय आयुक्त भविष्य निधि विश्वजीत सागर ने कहा कि अनेकता में एकता का भाव हर राज्य के खान-पान को देखकर महसूस होता है। इस कार्यक्रम के जरिए पूरे देश के जायके के बारे में जानकारी मिली। एसपी सिटी सुशील घुले ने बताया कि वह अक्सर अकेले ही रात में शहर के खास व्यंजनों का जायका लेने निकलते हैं। पेट के जरिए खाना दिल तक रास्ता बनाता है। यह क्लब और यह कार्यक्रम भारतीय व्यंजनों के लिए खास रहेगा। डा. रंजना बंसल ने भारतीय खान-पान की विशिष्टता को अनूठे ढंग से प्रदर्शित करने की सराहना की।

इसे रेनुका डंग की फोटो के साथ लगना है
गोरमे क्लब की अध्यक्ष और कार्यक्रम संयोजक रेनुका डंग ने बताया कि भाषा, बोली की तरह खानपान भी देश को जोड़ता है। खास यह कि क्लब की सदस्यों में खुद पकाने की ललक होती है क्योंकि यह परिवार की खुशियों का आधार बनता है।

इसे सुभाषिनी की फोटो के साथ लगना है
क्लब की सुभाषिनी पालीवाल ने आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला। बताया कि भोजन के जरिए स्वास्थ्य और स्वास्थ्य ही खुशी का आधार है, कुछ इस भाव से संतुलित भोजन पर क्लब में चर्चा होती है। देश भर के व्यंजन बनाने में सदस्यों ने जो उत्साह दिखाया उसने इस आयोजन को खास बना दिया।
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