आगरा के कारोबारी ने घर के लिए 3.12 करोड़ रुपये का लोन लिया। इसके बाद वह गंभीर बीमारी से पीड़ित हो गए। बैंक की किस्त अदा नहीं कर सके। बीमा करने वाली कंपनी ने भी किस्त नहीं चुकाई। इस पर उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली गई। आयोग ने बीमा कंपनी को समय पर ऋण की अदायगी के आदेश किए हैं।
सिविल लाइंस, नेहरू नगर निवासी अमित गोयल और रितु अग्रवाल ने सितंबर 2022 में उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय में परिवाद प्रस्तुत किया था। अमित गोयल ने 31 जुलाई 2019 में आईसीआईसीआई बैंक से 3.12 करोड़ रुपये का गृह ऋण (होम लोन) लिया था। यह 11 अक्तूबर 2019 को प्राप्त हुआ। लोन की किस्त 20 साल के लिए 2,85,881 रुपये थी। इस ऋण को सुरक्षित करने के लिए इनकम प्रोटेक्ट बीमा पालिसी ली थी। यह 10 अक्तूबर 2024 तक के लिए वैध थी। इसका प्रीमियम 5,91,180 रुपये था। इसमें गंभीर बीमारी का क्लेम भी शामिल था। इसमें 100 प्रतिशत अदायगी थी।
वर्ष 2020 में अमित बीमार हो गए। गंभीर बीमारी से ग्रसित होने के कारण होम लोन की किस्त नहीं दे सके। उनका बड़ा ऑपरेशन हुआ। वह 11 महीने से बेड पर हैं। बीमा करने वाली कंपनी किस्त की अदायगी करने में टालमटोल करने लगी। परिवाद पर आयोग के अध्यक्ष आशुतोष, सदस्य पारुल कौशिक और राजीव सिंह ने बीमा कंपनी को ऋण की शेष धनराशि की अदायगी के निर्देश दिए हैं। रकम पूर्ण रूप से चुकता होने तक अदा करने के आदेश दिए। साथ ही मानसिक उत्पीड़न एवं आर्थिक क्षतिपूर्ति के रूप में एक लाख रुपये देने के लिए भी कहा है।