आगरा। चैतन्यानंद सरस्वती ने होटल में कमरा लेते ही हाउसकीपिंग सर्विस के कर्मचारियों को हिदायत दे दी थी। कहा था कि बिना अनुमति कमरे में मत आना। जो नहाया न हो वो कमरे में प्रवेश न करे। कमरे में चप्पल उतार कर आएं। इस कारण कोई भी उसके कमरे में नहीं गया।
होटल में आने के बाद भी चैतन्यानंद सरस्वती अपने टैक्सी चालक के संपर्क में ही था। ऐसा लग रहा था कि वह उसके साथ रविवार को कहीं और जाने वाला था। उससे ही व्हाट्सएप काॅल पर बात कर रहा था। रात आठ बजे उसे काॅल करके फलाहार मंगाया। इस पर चालक ने होटल के बगल के रेस्तरां के कर्मचारी देवा को काॅल किया।
देवा ने बताया कि चालक ने उससे कहा कि फलाहार चाहिए। पहले उन्होंने मना किया। बाद में भोजन के लिए आलू तैयार करवाए। रात करीब आठ बजे एक कर्मचारी कमरे में दे आया। एक घंटे बाद चालक का फिर से काॅल आया। उसने इस बार व्रत वाली कुट्टू की पूड़ी और कद्दू की सब्जी मांगी। आधा घंटे बाद कर्मचारी वह भी दे आया। इसके बाद कोई काॅल नहीं आया।
आरोपी बाबा के पकड़े जाने के बाद कमरा दिलाने में सहयोग करने वाले काैशल और चालक टीटू ने फोन उठाना बंद कर दिया। देवा ने बताया कि खाने के बिल का भुगतान नहीं किया गया था। इस कारण वो चालक को काॅल कर रहा था मगर किसी ने काॅल रिसीव नहीं किया। बाद में पता चला कि स्वामी पार्थ सारथी ने होटल का भी भुगतान नहीं किया। कर्मचारी ने रकम मांगने का प्रयास किया तो पुलिसकर्मियों ने कहा कि रकम चाहिए तो दिल्ली आकर ले जाना।