मैनपुरी। सीजेएम तेंद्र पाल सिंह द्वारा दिए गए रिपोर्ट लिखने के आदेश में लापरवाही बरतना तत्कालीन इंस्पेक्टर कोतवाली ओमहरि वाजपेयी को महंगा पड़ा है। वर्तमान कोतवाली प्रभारी द्वारा कोर्ट में भेजी गई आख्या के बाद तत्कालीन इंस्पेक्टर के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में वाद दायर किया गया है। मामले की सुनवाई के लिए 27 नवंबर की तारीख तय की गई है। इंस्पेक्टर को नोटिस भेजकर तलब किया गया है।
शहर के यदुवंशनगर निवासी कामिनी यादव ने बिहार के तीन लोगों के खिलाफ गैस एजेंसी आवंटन कराने के नाम पर धोखाधड़ी करने की शिकायत सीजेएम कोर्ट में अगस्त 2019 में की थी। कामिनी ने इस संबंध में न्यायालय में कई साक्ष्य प्रस्तुत करके शपथपत्र भी दिया था। सीजेएम तेंद्रपाल ने मामले की सुनवाई करने के बाद 21 सितंबर को कोतवाली (वर्तमान तैनाती किशनी) प्रभारी ओमहरि वाजपेयी को इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए। न्यायालय के आदेश की कॉपी थाना कोतवाली के पैरोकार को भी उपलब्ध करा दी। जब कोतवाली में रिपोर्ट नहीं लिखी गई, तो कामिनी ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर प्रगति रिपोर्ट मंगाने की अपील की। सीजेएम द्वारा दिए गए आदेश के बाद भी तत्कालीन इंस्पेक्टर ओमहरि वाजपेयी ने इस मामले में लापरवाही बरती। उनके तबादले के बाद नए कोतवाल पीआर शर्मा द्वारा इस संबंध में कोर्ट में आख्या भेजी गई।
सीजेएम द्वारा इस मामले में तत्कालीन इंस्पेक्टर ओमहरि वाजपेयी की कार्यशैली पर नाराजगी जताई गई। सीजेएम के आदेश पर तत्कालीन इंस्पेक्टर ओमहरि वाजपेयी के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में वाद दायर किया गया है। सीजेएम ने उनके कृत्य को न्यायालय के आदेश की अवहेलना और लापरवाही मानते हुए नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई के लिए 27 नवंबर की तारीख तय कर दी है। नोटिस में कहा है कि इंस्पेक्टर ओमहरि वाजपेयी 27 नवंबर को न्यायालय में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के साथ ही अपना पक्ष भी रखें।