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UP: बेशकीमती जमीन के लिए बेगुनाह परिवार को बनाया अपराधी, बिल्डर को क्लीन चिट...फिर किसने कराया कब्जा

Tue, 22 Apr 2025 09:24 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा के बोदला के चर्चित जमीन कांड में एक बार फिर पुलिस फंस गई है। प्रकरण की जांच में सीआईडी (अपराध शाखा, अपराध अनुसंधान विभाग) ने चार नए मुकदमे लिखाने की सिफारिश की है। इसके साथ ही बिल्डर कमल चौधरी सहित नौ लोगों को क्लीनचिट दे दी है।
 
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बोदला जमीन प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा के बोदला के चर्चित जमीन कांड में सीआईडी की जांच रिपोर्ट में कई तथ्यों पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। जिस बिल्डर कमल चौधरी पर जमीन पर कब्जाने की साजिश का आरोप था, उसे क्लीनचिट मिल गई है तो फिर जमीन पर कब्जा किसने करवाया।
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इसके अलावा पुलिस ने गांजा और शराब बरामदगी के दो केस लिखे थे। पांच लोगों को जेल भेजा था। इन दोनों केसों को किसके इशारे पर लिखा गया, इसके बाद शासन के निर्देश के बाद डकैती और जमीन कब्जाने के केस भी लिखे गए। इनमें इंस्पेक्टर तक को जेल जाना पड़ा। जगदीशपुरा में बैनारा फैक्टरी के पास बेशकीमती जमीन पर कब्जे के लिए चहारदीवारी कराई गई। सिक्योरिटी गार्ड रखे और सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए थे। इसके पहले जमीन के केयरटेकर रवि कुशवाह, उसके भाई शंकरिया और ओमप्रकाश को गांजा बेचने के आरोप में जेल भेजा था।

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अगस्त 2024 में इस कार्रवाई बाद भी जमीन पर पदमचंद जैन परिवार कब्जा नहीं ले पाया था। अक्तूबर में दूसरा मुकदमा शराब तस्करी का लिखा गया। इसमें रवि की पत्नी पूनम और बहन पुष्पा को तस्करी की जेल भेजा गया था। केयरटेकरों को जेल भेजने के बाद ही जमीन पर कब्जा किया गया। दोनों मामलों में जगदीशपुरा पुलिस की मिलीभगत एसआईटी की जांच में सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने फर्जी तरीके से बैनामा कराने के आरोप में रवि कुशवाह, उमा सहित अन्य लोगों को जेल भेजा। एसआईटी ने अपनी जांच में पुलिस की भूमिका को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया। सीआईडी ने सिर्फ उस मुकदमे की विवेचना की जो उमा देवी ने लिखाया था। सवाल अभी तक नहीं सलझ सका है कि जमीन पर कब्जा करने की साजिश किसने रची?


 

गांजा और शराब बरामद करने के केसों की जांच अभी लंबित
गांजा बरामदगी के मुकदमे में विवेचक ने चार्जशीट लगाई थी। शराब बरामदगी का मुकदमा आबकारी विभाग की टीम ने लिखाया था। जनवरी 2024 में मामला तत्कालीन डीजीपी तक पहुंचने के बाद दोनों कार्रवाई शक के घेरे में आई थीं। गांजा और शराब बरामदगी की फर्द में शामिल पुलिस और आबकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। घटना की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई थी। तत्कालीन डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय ने गांजा बरामदगी के केस में अग्रिम विवेचना के आदेश किए थे। गांजा और शराब के मामले में दर्ज केसों की विवेचना का अभी तक निस्तारण नहीं हुआ है। निष्पक्ष विवेचना में कई पुलिस और आबकारी कर्मी फंस सकते हैं। इसलिए अभी तक विवेचना पूरी नहीं हो सकी है।

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फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र का केस भी लिखा जा चुका है
सीआईडी ने अपनी जांच रिपोर्ट में टहल सिंह का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के मामले में रवि कुशवाह आदि के विरुद्ध केस दर्ज कराने की सिफारिश की है, लेकिन यह केस पहले ही दर्ज हो चुका है। इसमें अभी तक जांच चल रही है।


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