आगरा। इनर रिंग रोड परियोजना में आगरा विकास प्राधिकरण ही नहीं, प्रशासनिक अधिकारियों ने भी अनियमितताएं कीं। एडीए ने प्रभावित किसानों से कोरे करार पत्रों पर हस्ताक्षर कराए। भूमि अध्यप्ति कार्यालय ने बिना परीक्षण के भूमि अवार्ड घोषित कर दी। जबकि निबंधन विभाग ने बैनामों में बड़े पैमाने पर हुई स्टांप चोरी को नजरअंदाज किया। ये खुलासे एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव द्वारा डीएम प्रभु एन सिंह को भेजी गई इनर रिंग रोड मामले की जांच रिपोर्ट से हुआ है।
इनर रिंग रोड के लिए 16 गांव की 163 हेक्टेयर भूमि की अधिग्रहण प्रक्रिया 2009 में शुरू हुई। 345 किसान भू-अधिग्रहण से प्रभावित हुए। 2013 तक 80 फीसदी प्रभावित किसानों को मुआवजा नहीं बांटा गया। गुतिला, गंगरुआ आदि गांव के 97 किसानों का मुआवजा अदालत में जमा है। 2021 में भी प्रोजेक्ट अधूरा है। प्रभावित काश्तकारों ने जिलाधिकारी, मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति तक न्याय की गुहार लगाई। अनियमितताओं के लिए दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की। जिसके बाद भी एडीए व प्रशासनिक अधिकारी जांच को दबाए रहे। 2019 में तत्कालीन कमिश्नर अनिल कुमार ने एडीएम निधि श्रीवास्तव को विस्तृत जांच के आदेश दिए। जिसके 2 साल बाद एडीए ने आठ अमीनों को दोषी करार दिया है।
मामले के मुख्य शिकायतकर्ता श्याम सिंह चाहर का कहना है कि एडीए व प्रशासन की मिलीभगत से मुआवजा वितरण से लेकर भू-अधिग्रहण में घोटाला हुआ है। अधिकारियों को एडीए बचा रहा है जबकि छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने एडीए की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए मामले में दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग रखी है। उन्होंने कहा, मैं दोबारा राष्ट्रपति को पत्र लिख इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करूंगा।