भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए आगरा से भेजे गए आलू के ट्रकों में से एक भी नेपाल तक नहीं पहुंचा। शहर के महेवा स्थित मंडी परिसर में इसे बेच दिया गया। बाकी ट्रक भी बीच सफर थमे हुए हैं। ‘अमर उजाला टीम’ की इस पड़ताल के बाद खरीद-फरोख्त करने वालों में खलबली मच गई। अपने बचाव में तरह-तरह की दुहाई देेने लगे।
शनिवार सुबह ‘अमर उजाला टीम’ मंडी परिसर पहुंची। उस समय एक ट्रक से पल्लेदार आलू उतार रहे थे। पूछताछ पर इसे स्थानीय व्यापारी की खरीद का आलू बताया गया। जबकि मंडी गेट के रजिस्टर में यह ट्रक नंबर उन चार ट्रकों में शुमार था, जो आगरा से भूकंप पीड़ितों के लिए काठमांडू के लिए रवाना किए गए थे। चारों ट्रक आगरा से शुक्रवार रात यहां पहुंचे थे। मंडी के अंदर ही बने आपदा राहत कंट्रोल रूम के रजिस्टर में इस ट्रक के बारे में कोई लिखा-पढ़ी नहीं की गई। इस मामले में मंडी सचिव सुभाष चंद्र यादव ने तर्क दिया कि काठमांडू तक जाने का भाड़ा न होने पर आगरा मंडी के सचिव की सलाह पर ही एक ट्रक आलू बिकवाया जा रहा है। दूसरी ओर, आगरा के मंडी उप निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव इससे इनकार करते हुए आलू भरे ट्रकों के साथ 45 हजार रुपये भाड़ा देने की बात कही है। इस बीच गोरखपुर के सीडीओ कुमार प्रशांत ने मंडी अफसरों को भाड़े की कमी चंदा जुटाकर पूरी करने के निर्देश दिए हैं। कुल मिलाकर गोरखपुर और आगरा के मंडी प्रशासन की नूराकुश्ती में एक ट्रक आलू जरूरतमंदों तक पहुंचने से पहले बिक गया।