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सरसों का तेल, रिफाइंड के लिए मध्यमवर्गीय को और ढीली करनी पड़ेगी जेब

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मैनपुरी। एक साल में सरसों के तेल सहित वनस्पति तेलों के दाम तेजी से बढ़े हैं। महंगाई ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। कोरोना काल में तेजी से बढ़ी महंगाई से आम आदमी परेशान होने लगा है। वहीं, बाजार पर भी महंगाई का असर पड़ रहा है।
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बाजार में तेजी से बढ़ रहे वनस्पति तेलों के दामों का असर सीधा मध्यमवर्गीय परिवार की रसोई पर पड़ रहा है। तुलना करें तो 2020 के मुकाबले तेलों के दाम 2021 में लगभग दोगुने हो गए हैं। एक साल पहले 90 रुपये किलो में बिकने वाला सरसों तेल इस समय बाजार में 160 रुपये लीटर तक बिक रहा है।
वहीं, 100 रुपये में मिलने वाला रिफाइंड का पैकेट बाजार में 150 से 160 रुपये में मिल रहा है। जबकि एक साल पहले 80 रुपये में मिलने वाला वनस्पति घी का पैकेट एक साल बाद बाजार में 140 रुपये में मिल रहा है। एक साल में वनस्पति तेलों के दामों में आई तेजी से मध्यमवर्गीय परिवार से लेकर दुकानदार तक परेशान हैं।
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एक साल पहले सरसों का तेल खुले बाजार में 90 रुपये किलो में बेचा था। अब सरसों का तेल 160 रुपये किलो में बेचना पड़ रहा है। महंगा होने के चलते ग्राहकों से माथापच्ची भी करनी पड़ती है। -अशोक गुप्ता, दुकानदार
बीते वर्ष लॉकडाउन से पहले खुले बाजार में 80 और 100 रुपये में मिलने वाले वनस्पति के पैकेट इस बार 140 से 160 रुपये के हो गए हैं। वनस्पति के दामों में महंगाई का इस बार बाजार पर सीधा असर हुआ है। -संजय गुप्ता, दुकानदार
कोरोना काल में महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। काम धंधे बंद चल रहे हैं। रोजाना कमाने खाने वाले के सामने घर चलाने का संकट आ गया है। ऐसे में सरकार को गरीब आदमी के हित में कुछ तो करना ही चाहिए। -सुभाषचंद्र, ग्राहक
घर की रसोई के लिए वनस्पति जरूरी है। वनस्पति लगातार महंगा होता जा रहा है। एक साल में दाम दोगुने हो चुके हैं। जबकि एक साल में आमदनी कम होती जा रही है। महंगाई पर रोक लगाई जानी चाहिए। -पंकज कुमार, ग्राहक
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