ये रहे मौजूद
उद्घाटन मौके पर आयोजन अध्यक्ष डॉ. सरोज सिंह, सचिव डॉ. रिचा सिंह, डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा, डॉ. जयदीप मल्होत्रा, डॉ. शशिलता काबरा, डॉ. स्मिता मनचंदा, डॉ. सविता त्यागी, डॉ. शिखा सिंह, डॉ. निधि गुप्ता, डॉ. आरती मनोज, डॉ. सीमा सिंह आदि मौजूद रहे।
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बढ़ती आबादी से कम हो रहे संसाधन
चार लाख से अधिक नसबंदी और एक दिन में 611 नसबंदी कर रिकाॅर्ड बनाने वाली पद्मश्री डॉ. ऊषा शर्मा ने बताया कि बढ़ती आबादी से संसाधन कम हो रहे हैं। एनमिक समेत कई बीमारियां पनप रही हैं। मौतें हो रही हैं। ज्यादा संतान करने वालों की काउंसिलिंग कर सीमित परिवार के लिए जागरूक करना पड़ेगा। ज्यादा संतान वालों को निशुल्क राशन, नौकरी में प्रमोशन और आरक्षण के लाभ से वंचित कर देना चाहिए।
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रक्तस्राव से नहीं जाएगी जान
अहमदाबाद के डॉ. महेश गुप्ता ने बताया कि प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव से देश में औसतन एक लाख में से 110 प्रसूताओं की मौत हो रही है। सबसे ज्यादा असम में 130 और केरल में सबसे कम 30 की मौत हो रही है। उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान और बिहार में भी 90-100 प्रसूताएं दम तोड़ रही हैं। प्रसव पीड़ा अधिक देर तक होना, उच्च रक्तचाप, एनमिक और नवजात का 3.5 किलो या इससे अधिक होना बड़ी वजह है। कॉमोक-एमजी तकनीकी से शत प्रतिशत प्रसूताओं की जान बची है, गर्भाशय भी निकालने की जरूरत नहीं पड़ी है। इसका 2015 में पेटेंट भी करा चुका हूं।
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लिपस्टिक, डाई से भी खतरा
बंगलूरू की डॉ. शीला माने ने बताया कास्मेटिक सामग्री और कलर डाई के उपयोग से बांझपन और बच्चेदानी कैंसर का खतरा भी बढ़ गया है। कॉस्मेटिक लिपस्टिक समेत अन्य में खतरनाक रसायन उपयोग किए जा रहे हैं। ये बच्चेदानी में पहुंचकर संक्रमण करते हैं। ऐसे ही कलर डाई में भी कई खतरनाक रसायन हैं। इससे महिलाओं में आंख, त्वचा, बालों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। राेम छिद्रों के जरिये से शरीर में भी पहुंच रहे हैं। इससे बच्चेदानी के कैंसर का खतरा भी बढ़ गया है। डॉ. जसनीत ढींगरा ने भी कास्मेटिक सामान में रसायनों के अधिक इस्तेमाल से होने वाली परेशानियों के बारे में बताया।