फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

व्यथा: पाकिस्तान से लड़ाई में जीते, परिस्थितियों से हारे, रामलाल वृद्धाश्रम की शरण में पहुंचे 80 साल के सेवानिवृत्त हवलदार भंवर सिंह

Mon, 31 Jan 2022 10:47 AM IST
Abhishek Saxena संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

आश्रम में बातचीत के दौरान भंवर सिंह ने बताया कि उनके हार्ट के तीन ऑपरेशन हो चुके हैं। जीवन के इस मुकाम पर अपने को अकेला महसूस कर रहे हैं। पत्नी फूलवती से फोन पर बात हुई थी। वह कह रहीं थी कि मेरे को भी अपने पास बुला लो।
विज्ञापन
भंवर सिंह - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गोलियां और तोप सेना के जिस जवान के गहने हुआ करते थे, उसके जीवन में आज दर्द और आंसू हैं। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में दुश्मनों के सामने शेर की दहाड़ मारने वाला सेना का सेवानिवृत्त हवलदार भंवर सिंह इन दिनों अकेले रह रहे है। 80 साल के भंवर सिंह बेटे से हुई आए दिन की तकरार के  रामलाल वृद्ध आश्रम की शरण में पहुंचे। 
विज्ञापन

बेटे की बात का दौर चलता है, तो भंवर सिंह शांत हो गए। फिर बेटे की बात करते-करते उनकी आवाज डबडबाने लगी। गांव करकौली, पिनाहट के रहने वाले भंवर सिंह कहते हैं कि घर में रोज की तनातनी से परेशान होकर आश्रम आए हैं। उन्हें इस बात का दुख है कि देश सेवा करने के बाद जीवन के शेष सफर को घर की खुशियों के साथ साझा करना चाहते थे, लेकिन उनकी किस्मत में इस उम्र में ऐसे नहीं हो सका। 
भंवर सिंह की उपलब्धियां 
विजेता मेडल 
पश्चिमी स्टार मेडल 
गुड सर्विस मेडल 
सरकार ने दी थी 18 बीघा जमीन 
पाकिस्तान सेना के छक्के छुड़ाने वाले भंवर सिंह को सरकार की ओर से 18 बीधा जमीन दी गई थी। भंवर सिंह का कहना है कि पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में शामिल सैनिकों को भारत सरकार के आदेश पर जमीन मिली थी। इसके तहत ही उन्हें भी जमीन मिली थी। 
विज्ञापन

पत्नी ने कहा-मुझे भी बुला लो
आश्रम में बातचीत के दौरान भंवर सिंह ने बताया कि उनके हार्ट के तीन ऑपरेशन हो चुके हैं। जीवन के इस मुकाम पर अपने को अकेला महसूस कर रहे हैं। पत्नी फूलवती से फोन पर बात हुई थी। वह कह रहीं थी कि मेरे को भी अपने पास बुला लो।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें