मोहल्ला मिश्राना के श्रीकृष्ण उर्फ लल्ला चौबे ने बताया कि 15 अगस्त 1947 को जिलेभर में जश्न का माहौल था। लोगों ने अपने घरों और दुकानों पर दीपक जलाकर जश्न मनाया था। चौराहों पर एकत्रित होकर देशप्रेम के नारे लगाए थे। अपनी दुकानों और मकानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर खुशी जताई थी। चारों और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत नारे लग रहे थे।
टीकाराम चतुर्वेदी ने कहा कि आजादी के आंदोलन के दौरान देश में जो माहौल बना था, वो देश के आजाद होने पर चौगुना हो गया था। शहर का संता-बसंता चौराहा आज भी खुशी के माहौल का गवाह है। चौराहे के आसपास के मकान और दुकानों की सजावट करके लोगों ने जश्न मनाया था। जिलेभर में प्रभातफेरी निकाली गई थी। आजादी का यह जश्न पूरी साल चला था।
औंछा निवासी कृष्ण गोपाल गुप्ता ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस का अब पहले जैसा माहौल नहीं है। लोगों की सोच में बदलाव आ गया है। युवा पीढ़ी आजादी का इतिहास भूल चुकी है। जिले में पहला स्वतंत्रता दिवस कैसे मनाया गया। इसकी युवा पीढ़ी को जानकारी ही नहीं है। अब स्वतंत्रता दिवस पर रस्म अदायगी होती है।