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UP: दुधारू पशुओं में बढ़ा लू लगने का खतरा, दुग्ध उत्पादन हो रहा प्रभावित; विशेषज्ञों ने बताए बचाव के उपाय

Mon, 08 Jun 2026 03:37 PM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

गर्भावस्था के अंतिम तीन महीनों में गाभिन पशुओं को प्रतिदिन 1 से 1.5 किलोग्राम अतिरिक्त दाना देना लाभकारी रहता है। इसके अलावा प्रत्येक पशु को 30 से 50 ग्राम खनिज मिश्रण और लगभग 25 ग्राम नमक प्रतिदिन दिया जाना चाहिए।
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पशु। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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अधिक गर्मी और उमस के कारण पशुओं में लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में पशु हांफने लगते हैं, चारे का सेवन कम कर देते हैं। दुग्ध उत्पादन प्रभावित होता है।
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कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी के पशुपालन विशेषज्ञ धर्वेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि पशुओं को गर्मी और उमस के प्रभाव से बचाने के लिए हवादार एवं साफ-सुथरे शेड की व्यवस्था आवश्यक है। पशुओं को दिनभर स्वच्छ एवं ठंडा पानी उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने बताया कि दुग्ध उत्पादन लागत का 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा आहार पर खर्च होता है। 

ऐसे में वैज्ञानिक आहार प्रबंधन अपनाकर उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत को नियंत्रित किया जा सकता है। पशुओं को उनकी शारीरिक आवश्यकता और दूध उत्पादन के अनुसार हरा चारा, सूखा चारा तथा संतुलित दाना दिया जाना चाहिए।
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गाभिन पशुओं को अतिरिक्त पोषण देने की सलाह
पशुपालन विशेषज्ञ ने बताया कि गर्भावस्था के अंतिम तीन महीनों में गाभिन पशुओं को प्रतिदिन 1 से 1.5 किलोग्राम अतिरिक्त दाना देना लाभकारी रहता है। इसके अलावा प्रत्येक पशु को 30 से 50 ग्राम खनिज मिश्रण और लगभग 25 ग्राम नमक प्रतिदिन दिया जाना चाहिए।
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