आगरा में नोटबंदी के दौरान कालेधन को ठिकाने लगाने वाले आगरा और मथुरा के तीन बड़े बुलियन कारोबारियों पर आयकर की कार्रवाई फिर शुरू हो गई है। सोमवार को मथुरा में आरएस बुलियन और मंगलवार को आगरा में अजय अवागढ़ के परिसरों से प्रोहिबिटरी आर्डर (पीओ) हटा दिए गए। कागजातों की जांच में आयकर अधिकारियों को करोड़ों की बेनामी संपत्तियां मिली हैं।
123 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग और एक ही दिन में 37 करोड़ रुपये का सोना बेचने वाले बुलियन कारोबारियों पर आयकर ने जांच पड़ताल फिर शुरू कर दी है। आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग ने पिछले महीने 19 से 21 जुलाई तक मथुरा के आरएस बुलियन, आगरा के अजय अवागढ़ और सुशील चौहान के आगरा, मथुरा, दिल्ली, मुंबई स्थित 31 प्रतिष्ठानों पर छापा मारा था, इनमें से 24 जगह के सर्च वारंट थे।
इन सभी जगहों पर आयकर विभाग ने पीओ लगा दिए थे। अजय अवागढ़ और आरएस बुलियन केनीरज अग्रवाल के प्रतिष्ठानों से इन पीओ को अब खोल दिया गया है। यहां से जांच में कई दस्तावेज ऐसे मिले हैं, जिनसे बेनामी संपत्तियों का खुलासा हुआ है। इनके खिलाफ बेनामी संपत्ति कानून में कार्रवाई होनी तय है। वहीं प्रवर्तन निदेशालय को आयकर विभाग पहले ही जांच की संस्तुति कर चुका है।
सुशीला चौहान की फिर होगी जांच
बुलियन कारोबारियों पर आयकर छापे में केवल सुशीला चौहान ही ऐसे रहे, जिनके पास से राजनेता के नाम की पर्ची मिली थी, जिनका पैसा नोटबंदी के दौरान सुशीला ने सफेद किया था। अजय अवागढ़ और नीरज अग्रवाल के बाद सुशीला चौहान के प्रतिष्ठानों से पीओ हटाकर जांच शुरू की जाएगी। आयकर अधिकारियों को उम्मीद है कि कई बड़े खुलासे चौहान के प्रतिष्ठानों से ही होंगे। हाल के तीन सालों में सुशीला चौहान की सत्ताधारी पार्टी के नेताओं से नजदीकी बढ़ी है और कई नेताओं के काले धन को नोटबंदी के दौरान उसने ठिकाने लगाया है।
दो लॉकरों में से मिली ज्वैलरी की सीज
आयकर विभाग ने मंगलवार को बुलियन कारोबारियों के सहयोगियों के दो बैंक लॉकर खोलकर जांच की। सहयोगी कारोबारियों ने जो कागजात दिए थे, उन्हें छोड़कर लॉकर में मिली पूरी ज्वैलरी सीज कर दी गई। इन लॉकरों में ढाई किलो सोने और हीरे के आभूषण थे और इनके मान्य दस्तावेज कारोबारी नहीं दिखा सके। आयकर विभाग इस सप्ताह बुलियन कारोबारियों के अन्य लॉकरों की जांच भी पूरी कर लेगा।