फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्मार्ट सिटी के मामले में ठगा सा रहा गया आगरा

Fri, 29 Jan 2016 01:38 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
विज्ञापन
शहरवासियों के ‘स्मार्ट सिटी’ के सपनों पर पानी फिर गया है। उनकी जागरूकता और एकजुटता के बावजूद ताजनगरी देश के पहले 20 स्मार्ट शहरों में जगह बना पाने में नाकामयाब रही। सुनहरा मौका हाथ से निकलने पर नगर निगम, कंसल्टेंट कंपनी भी सकते में हैं।  
विज्ञापन

केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने गुरुवार को देश के पहले 20 स्मार्ट शहरों की सूची जारी कर दी। इसमें आगरा सहित प्रदेश के एक भी शहर का नाम नहीं है। इसकी वजह से एतिहासिक नगरी फिलहाल स्मार्ट सिटी के बजाय ताजनगरी के नाम से ही जानी जाएगी। इससे शहरवासियों को तगड़ा झटका लगा है। देश के सौ स्मार्ट शहरों की सूची में अपने शहर को ‘नंबर वन’ पर लाने के लिए लोगों ने ऑनलाइन वोटिंग के लिए दिन-रात एक कर दिए थे। न सिर्फ कंसल्टेंट कंपनी के अधिकारियों ने, बल्कि नगर निगम और सामाजिक संगठनों ने शहर में जगह-जगह वोटिंग के लिए कैंप आयोजित किए। 10 हजार विद्यार्थियों ने सड़क पर उतरकर जागरूकता का संदेश दिया था। धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक कार्यक्रमों में वोटिंग की अपील की गई। इसी परिश्रम का नतीजा था कि महज 10 दिनों में 6,71,747 वोट डालकर शहर को वोटिंग में नंबर एक पर लाकर खड़ा कर दिया था। बावजूद इसके शहर पिछड़ गया। शहरवासी शहर में स्मार्ट सुविधाओं के जो सपने देख रहे थे, उन पर पानी फिर गया है। हालांकि उम्मीद पूरी तरह से नहीं टूटी है। क्योंकि केंद्र सरकार स्मार्ट सिटी के लिए सौ शहरों में से हर साल 20 शहरों को चुनेगी। मगर, अपना शहर का नंबर किस साल आएगा, यह अभी तय नहीं है। बता दें कि इस योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार मिलकर पांच साल तक हर साल एक हजार करोड़ रुपये विकास कार्यों पर खर्च करेंगी।
ऐसे होंगे स्मार्ट शहर
परियोजना के तहत स्मार्ट बनाए जा रहे शहरों में बिजली-पानी की आपूर्ति, सफाई और ठोस कचरा प्रबंधन, समुचित शहरी आवागमन, सार्वजनिक परिवहन, सूचना-प्रौद्योगिकी की कनेक्टिविटी, ई-गवर्नेंसए बुनियादी सुविधाएं और नागरिक सहभागिता पर खास ध्यान दिया जाएगा।
विज्ञापन

बता दें कि देश के सौ स्मार्ट शहरों की सूची में प्रदेश के 13 शहर शामिल हैं।  टॉप 20 की दौड़ में पिछड़ने के क्या कारण रहे, केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने फिलहाल इस पर से पर्दा नहीं उठाया है।
आज पता चलेगा, हम कहा चूके
किन कारणों से अपना शहर पिछड़ा इसकी जानकारी नहीं हो पाई है। शहरी विकास मंत्रालय के अधिकारियों के साथ शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग है, इसमें पता लगाया जाएगा कि हम कहा चूके। जहां अपनी कमी होगी, उस पर मंथन किया जाएगा और भविष्य में उन गलतियों को सुधारा जाएगा। फिर भी उम्मीद हारे नहीं हैं। हमारी कोशिशें जारी रहेंगी।
- इंद्रविक्रम सिंह, नगर आयुक्त
कुछ भी कह पाना संभव नहीं है कि आगरा कहां मात खाया। लोगों की सहभागिता और प्रस्ताव के आधार पर अपनी दावेदारी काफी मजबूत थी।
- विनय पटेल, प्रोजेक्ट एसोसिएट, अरबन मैनेजमेंट सेंटर

स्मार्ट सिटी की सूची में आगरा के शामिल न होने के लिए भाजपा जिम्मेदार है। इस पार्टी के नेताओं की कथनी और करनी में फर्क है। शहरवासियों ने अपनी पूरी जिम्मेदारी निभाते हुए जमकर वोटिंग की। मैं उनका धन्यवाद करता हूं। मगर, भाजपा नेताओं से कहना चाहता हूं कि विकास के मुद्दों पर राजनीति न करें।
- इंद्रजीत सिंह आर्य, महापौर

भारतीय जनता पार्टी आगरा के लिए कभी गंभीर नहीं रही है। यहां से भाजपा के सांसद जीते, विधायक जीते, मेयर इन्हीं के रहे, लेकिन भाजपा ने हाईकोर्ट, बैराज, एयरपोर्ट, पासपोर्ट आफिस जैसे किसी मामले में कुछ नहीं किया। केवल सांप्रदायिकता की आग भड़काकर वोटों का सौदा किया है। स्मार्ट सिटी की बात कोरा छलावा था। ख्वाब दिखाकर जनता के साथ धोखा किया गया है।
- रईसुद्दीन कुरैशी, शहर अध्यक्ष सपा

एतिहासिक शहर, जहां दुनियाभर के पर्यटक आते हैं, इसे सूची में शामिल नहीं करना दिखाता है कि मोदी सरकार की नीयत और नीति में फर्क है। पौने दो साल के कार्यकाल में जनता भलीभांति समझ चुकी है कि मोदी सरकार केवल लुभावने वायदे करना जानती है। धर्म और जाति की राजनीति करके झूठ वायदे करने वालों की हकीकत से जनता वाकिफ हो चुकी है।
- सुनील कुमार चित्तौड़, जोनल कोआर्डिनेटर, बसपा
केंद्र सरकार ने आगरा की जनता के विश्वास को ठगा है। स्मार्ट सिटी आगरा का हक है। यहां ताज समेत तीन हेरिटेज स्मारक हैं, जो सूची में शामिल होने को तैयार हैं। टूरिस्ट सिटी को स्मार्ट सिटी से वंचित रखना गलत है। लच्छेदार बातों से काम नहीं चलता है। प्रदेश की जनता के सौतेला व्यवहार जनता समझ चुकी है। इसके परिणाम जल्द दिखाई देंगे।
डा. धर्मपाल सिंह, विधायक बसपा
भाजपा के केंद्रीय मंत्री की लचर पैरवी के कारण विश्व विख्यात पर्यटन नगरी को स्मार्ट सिटी के सौगात से वंचित रहना पड़ गया। ये दुर्भाग्य की बात है, लेकिन जिस तरह से पूरी यूपी के किसी जिले को इसमें शामिल नहीं किया गया है, उससे लगता है कि केंद्र की मोदी सरकार का रवैया दोगला है। गुजरात मॉडल के वायदों का क्या हुआ। इस बारे में यूपी की जनता को फिर से सोचना होगा।
-उपेंद्र सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष, कांग्रेस
स्मार्ट सिटी की वोटिंग में जिस तरह से आगरावासियों ने उत्साह दिखाया था। उससे लग रहा था कि आगरा एक सौ शहरों में नंबर वन बनने जा रहा है। ताजमहल देश की शान है, और पूरी दुनिया में इसका नाम है। ताजनगरी को स्मार्ट सिटी के लिए न चुने जाने पर पूरा देश हैरान है। इसे तो सबसे पहले चुना जाना चाहिए था।
-  शब्बीर अब्बास, प्रदेश महासचिव, कांग्रेस
केंद्र सरकार विकास और देशहित के नाम पर आम जनता को गुमराह कर रही है। जब दुनिया के सात अजूबों में एक ताज के शहर को स्मार्ट सिटी बनाने लायक नहीं माना गया तो क्या समझा जाए। आगरा में बैठे भाजपा के दमदार नेता क्या कर रहे हैं। उन्होंने स्मार्ट सिटी में आगरा की पैरवी क्यों नहीं की। जनता ऐसी पार्टी को दे देगी। आगरा का चयन नहीं होना वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है।
शबाना खंडेलवाल, वरिष्ठ नेता, कांग्रेस
शहरवासियों ने तय की थीं तमाम प्राथमिकताएं
एक फोन पर गंदगी, पानी, बिजली की समस्या का निस्तारण। घर बैठे ही इंटरनेट के माध्यम से बिजली-पानी सहित तमाम बिल जमा। स्मार्ट कार्ड के जरिये बस, ट्रेन, पार्किंग, स्मारकों की प्रवेश टिकट, होटल आदि का पेमेंट। वाईफाई सुविधा के साथ-साथ सीसीटीवी कैमरों से शहर की यातायात और सुरक्षा पर नजर...और न जाने क्या-क्या। फिलहाल शहरवासियों के लिए यह सब दूर की कौड़ी है। उन्होंने शहर के लिए तमाम प्राथमिकताएं तय की थीं। इसी आधार पर कंसल्टेंट कंपनी अरबन मैनेजमेंट सेंटर के अधिकारियों ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के लिए प्रस्ताव तैयार किया था। दुनिया में पर्यटन के मानचित्र पर ताजमहल की वजह से अहम स्थान रखने वाले शहर को पहले चरण में जरूर मौका मिलना चाहिए था। यहां अंतर्राष्ट्रीय स्तर और स्मार्ट सुविधाओं की काफी जरूरत है।
क्षेत्र विकास - 55 फीसदी लोग चाहते थे कि पहले ताजमहल, ताजगंज और इनररिंग रोड के आसपास के क्षेत्र का विकास किया जाए।
दृष्टिकोण - 39 फीसदी लोगों का स्मार्ट सिटी के तौर पर शहर के बारे में दृष्टिकोण था कि इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एतिहासिक शहर के रूप में विकसित किया जाए।
सुविधा - 98 फीसदी लोग स्मार्ट कार्ड के प्रचलन को बढ़ावा देने के पक्षधर थे, जिससे कि भविष्य में पब्लिक बस, मेट्रो, ट्रेन, पार्किंग, शटल बस, स्मारकों के प्रवेश टिकट, होटल, रेस्टोरेंट और शोरूम पर एक ही कार्ड से पेमेंट किया जा सके।
विज्ञापन

प्राथमिकता - 32 फीसदी लोग चाहते थे कि शहर की एतिहासिक विरासतों को सहेजा जाए और संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें