नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर यमुना को प्रदूषण से बचाने के लिए आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ने जो कदम उठाए हैं उससे दयालबाग के लोगों की मुश्किल बढ़ गई है। वैकल्पिक इंतजाम किए बगैर पहले तो सीवर लाइन बंद कर दी और अब इसके पाइप उखाड़कर रास्ता बंद कर दिया है। पाइपों को निकालने के लिए खोदे गहरे गड्ढों को खुला ही छोड़ दिया है। इससे राजश्री एस्टेट के लोग तो कैद हो ही गए हैं, दूसरे लोगों के लिए भी खतरा खड़ा कर दिया है। विरोध के बावजूद गड्ढों को पाटने के लिए एक-दूसरे पर टालते रहे। अंधेरा होने के कारण आखिर में सभी काम अधूरा छोड़कर चले गए। इसको लेकर क्षेत्रीय लोगों में काफी आक्रोश है।
शनिवार दोपहर को एडीए की टीम सिटी मजिस्ट्रेट रेखा एस चौहान के नेतृत्व में पुलिस बल के साथ दयालबाग स्थित राजश्री एस्टेट के सामने पिछले दिनों बंद की गई सीवर लाइन को हटाने पहुंची। यह टीम मंगलवार को भी वहां गई थी, लेकिन लोगों के विरोध के चलते उल्टे पांव लौटना पड़ा। शनिवार को एडीए का बुल्डोजर देख राजश्री एस्टेट में रहने वाली महिलाएं बाहर निकल आईं। उन्होंने कार्रवाई का विरोध किया। उनका सवाल था कि पाइप उखाड़ने के बाद गड्ढों को कौन भरेगा। इस पर एडीए ने नगर निगम पर डाल दिया। नगर निगम अधिकारियों से उन्होंने बात की तो जलकल की ओर इशारा कर दिया। इस पर महिलाओं में आक्रोश भड़क गया। उन्होंने जलकल अधिकारियों से गड्ढों को भरने के लिए कहा तो उन्होंने कहा कि यह पाइप एडीए उखाड़ रहा है तो वही इसे भरेगा। मगर, अंत तक निष्कर्ष नहीं निकला तो महिलाओं ने विरोध शुरू कर दिया, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। देर शाम तक चले अभियान के दौरान एडीए के बुल्डोजर ने पांच-छह पाइप उखाड़ दिए। अंधेरा होने टीम गड्ढे को खुला छोड़ गई।
सीवर लाइन कनेक्शन करने पहुंची टीम
कार्रवाई के दौरान जलकल की महाप्रबंधक मंजू गुप्ता के नेतृत्व में उनके विभाग की टीम लोगों को सीवर लाइन के कनेक्शन देने के लिए मौके पर मौजूद थी। उन्होंने लोगों से अपील की कि अपने घरों का सीवर वह जल निगम द्वारा डाली गई सीवर लाइन से प्रवाहित करें। इस पर लोगों का कहना है कि जल निगम द्वारा डाली गई सीवर लाइन काफी कम चौड़ी है। इसमें दयालबाग क्षेत्र का गंदा पानी नहीं आ सकता।
फिर भी एनजीटी की मंशा नहीं हुई पूरी
एनजीटी चाहता है कि यमुना को प्रदूषण से मुक्त किया जाए। मगर, स्थानीय अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति में लगे हैं। ट्रिब्यूनल के आदेश पर पिछले दिनों एडीए ने दयालबाग की इस सीवर लाइन को बंद कर दिया था। मगर, इसके बाद क्षेत्र के गंदे पानी की निकासी का कोई बंदोबस्त नहीं किया। स्थिति यह है कि लगभग 40 कालोनियों का गंदा पानी गलियों में बह रहा है। यह गंदा पानी फिर से यमुना में ही जा रहा है।