सूर्य को पितरों का कारक ग्रह माना गया है। 28 सितंबर से शुरू हो रहे श्राद्ध पक्ष में पूरे समय सूर्य और राहु की युति रहेगी। इस कारण ग्रहण योग बनेगा। इसलिए इस दौरान पितरों को प्रसन्न करने के लिए किए जाने वाले उपाय विशेष पुण्य फलदायी रहेंगे। श्राद्ध पक्ष पितरों को प्रसन्न और श्राद्ध करने वाले को सुख संपत्ति देने वाला रहेगा। पितृपक्ष में इस बार ग्रहण योग, गज छाया योग, अमृत सिद्ध योग, सर्वार्थ सिद्ध योग बन रहे हैं।
श्राद्ध पक्ष 28 सितंबर (सोमवार) से शुरू होकर 12 अक्टूबर (सोमवार) तक चलेगा। श्राद्ध पक्ष की शुरूआत चंद्रग्रहण में होगी। इस दौरान सूर्य और राहु की युति होने से 15 दिन तक ग्रहण योग रहेगा। यह ग्रहण देश में न दिखने के कारण कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा। इससे पहले 1977 में भी पितृपक्ष की शुरूआत चंद्रग्रहण के साथ हुई थी। ज्योतिषाचार्य शिव शरण पाराशर ने बताया कि 19 साल बाद गज छाया योग भी बन रहा है। इस योग में श्राद्ध तर्पण पिंडदान करने से पांच गुना अधिक पुण्यफल प्राप्त होता है। इस योग में पितरों के निमित्त श्राद्ध आदि करने से वे पूर्णत: तृप्त होंगे। वह श्राद्ध करने वाले को धन, धान्य, पुत्र , पौत्र, सुख, संपत्ति का सुख प्राप्त होगा। श्राद्ध पक्ष में 29 सितंबर से तीन अक्टूबर तक अमृत सिद्ध योग बन रहा है। 11 अक्टूबर को दिन भर सर्वार्थ सिद्ध और रात में अमृत सिद्ध योग रहेगा। यह दिन पितृ पूजा के लिए विशेष होंगे। 12 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या पर सोमवती का योग बन रहा है। इस दौरान तर्पण पिंडदान करने से विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।