एडीजीसी अनूप कुमार यादव ने बताया कि गवाही देने वालों में पीड़ित बालिका, उसके पिता, विवेचक, थाने के मुंशी, मेडिकल करने वाली डॉक्टर और विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने गवाही दी। इमाम के जेल में होने के कारण हर तारीख पर गवाही हुई। बालिका के पिता ने इमाम को सजा दिलाने के लिए जमकर पैरवी की। हर तारीख पर अदालत पहुंचकर इमाम को उसके गुनाह की सजा दिलाने के लिए प्रयास किया। इमाम को सजा मिलने पर पीड़िता के पिता ने कहा कि अल्लाह के यहां देर है, लेकिन अंधेर नहीं है।
सजा सुनते ही रो पड़ा इमाम
जेल से निर्णय सुनने के लिए इमाम जमाल अहमद को अदालत में लाया गया। स्पेशल जज पूनम ने जब उसको उम्रकैद की सजा सुनाई तो वह कुछ समय के लिए सदमे में आ गया। सजा सुनने के बाद इमाम अदालत से बाहर निकलकर खूब रोया। अदालत से पुलिसकर्मी उसको हिरासत में लेकर जेल चले गए।
पीड़िता को मिलेगी जुर्माने की धनराशि
दुष्कर्मी इमाम जमाल अहमद पर एक लाख एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। एडीजीसी विश्वजीत राठौर ने बताया कि स्पेशल जज पॉक्सो पूनम ने आदेश में लिखा है कि जुर्माने की पूरी धनराशि पीड़िता किशोरी को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी।