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मॉकड्रिल की जांच में फिसड्डी, मीडिया पर निकाल रहे गुबार

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आगरा। आईएमए के कुछ पदाधिकारियों का दोहरा चेहरा सामने आया है। पीड़ितों का दर्द समझे बिना श्रीपारस हॉस्पिटल के पक्ष में खड़े हो गए हैं। पूरा दोष मीडिया को देते हुए उनको विज्ञापन न देने तक की अपील कर रहे हैं।
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आईएमए की जनरल बॉडी मीटिंग में एक पदाधिकारी श्रीपारस हॉस्पिटल की पैरवी करते हुए अखबारों में लिखी जा रही खबरों पर भड़क गए। यह पीड़ितों की बात उठाने पर मीडिया को दोष दे रहे हैं। यह वही पदाधिकारी हैं, जो मीडिया में पीड़ितों के हमदर्द बनकर दूध का दूध पानी का पानी होने की बात कहते रहे हैं। इन्होंने सीधे तौर पर मीडिया को विज्ञापन न देकर सबक सिखाने के लिए ग्रुप पर लिखा है। इनकी बातों का दो-तीन पदाधिकारियों ने समर्थन भी किया है, कुछ चिकित्सक ऐसे भी हैं, जिन्होंने मीडिया को दोष देने को गलत बताया।
जनरल बॉडी मीटिंग के ग्रुप पर लिखी खास बातें
एक
स्थानीय प्रिंट मीडिया इस समय चिकित्सकों के खिलाफ चल रहा है, आधे-आधे पेज की स्टोरी रोज चल रही है, ताकि उनकी खबर को सही सिद्ध किया जा सके। हमारे अपने मित्रों के पैसे से कमाई करने वाले, हमारे अन्य किसी दूसरे मित्र के खिलाफ लिखने में जरा भी नहीं हिचकते, ऐसे स्थानीय समाचार पत्रों को हमें अपने क्लीनिक और नर्सिंग होम पर लेना बंद करना चाहिए। इन तक अपना मैसेज पहुंचाने का यही तरीका है।
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दो
जिससे और लोग अखबारों में विज्ञापन नहीं दें और फिर कुछ चुनिंदा लोग एंबुलेंस के जरिये सारे मरीज अपने नर्सिंग होम में बुलाएं।
तीन
केंद्र सरकार के निर्देशानुसार हम सब को समाचार पत्रों में विज्ञापन देना बंद करना है....।
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