आगरा। नकली-सरकारी दवाओं का सिंडिकेट कई राज्यों तक है। गिरोह के सदस्य नामी कंपनियों और सरकारी दवाओं की रीलेबलिंग कर बिना बिल के अवैध कारोबार करते थे। इसमें निरस्त हो चुके लाइसेंस से भी फर्जी बिल बनाते थे। एसटीएफ भी जांच कर रही है। गाजियाबाद से भी आरोपी पकड़े हैं। इन सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है। इसके लिए थाना कोतवाली में तहरीर दे दी है। एसटीएफ ने कई आरोपी पकड़ लिए हैं।
विभोर मेडिकल एजेंसी ने नामी कंपनी की टैबलेट चाइमोरल फोर्टे (चोट में सूजन कम करने), टैबलेट शेल्कल (कैल्शियम और विटामिन डी) ने अंशिका फार्मा से भारी मात्रा में दवाएं खरीदी कर कोलकाता में पाल ब्रदर्स को बेच दिया। संचालक संजीव कुमार गुप्ता के प्रतिष्ठान के स्टॉक रजिस्टर में अंशिका फार्मा को बेची गई दवाओं का रिकॉर्ड मिले, लेकिन बिल फर्जी पाए गए। इसमें दवाएं गोरखपुर की गुप्ता मेडिकल एजेंसी और आगरा के हर्षित ट्रेडर्स से खरीदी दर्शाईं गईं। इन दोनों फर्म के संचालकों ने इसकी मनाही की। वरदान मेडिकल एजेंसी के यहां एंटीबायोटिक जोस्टम-ओ टैबलेट का स्टॉक मिला। इस पर ईएसआई सप्लाई नॉट फॉर सेल लिखा था। जांच में चाइमोरल फोर्टे का एक नमूना अधोमानक और पेट रोग की एसिलोक दवा नकली मिली। इसके संचालक अंकुर अग्रवाल ने स्वीकार किया कि ये सभी नकली दवाएं विभोर मेडिकल एजेंसी के संजीव कुमार गुप्ता से बेहद कम कीमत पर खरीदी थीं। इसका बिल भी नहीं दिया। इससे विभोर मेडिकल एजेंसी, वरदान मेडिकल एजेंसी, हर्षित ट्रेडर्स, गुप्ता मेडिकल एजेंसी और कोलकाता के पाल ब्रदर्स संगठित गिरोह का खुलासा हुआ।
एफएसडीए की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब का कहना है कि नकली-सरकारी दवाओं के अवैध कारोबार का सिंडिकेट पकड़ा है। इन सभी के खिलाफ एफआईआर कराई जा रही है। जांच अभी चल रही है, इसमें कई और भी शामिल हैं।
इंजेक्शन पर भी री-लेबलिंग
21 मई युग फार्मा में इंसुलिन के इंजेक्शन पर री-लेबलिंग की गई थी। ये इंजेक्शन शारदा फार्मा से बिना बिल के खरीदे। इसके संचालक शिवम गुप्ता ने ये इंजेक्शन आरएमडी फार्मा के संचालक राजेश गुप्ता से लिए थे। शारदा फार्मा के सीसीटीवी फुटेज देखने पर छापे की भनक लगते ही प्रोपराइटर का भाई और उसके कर्मचारी भारी मात्रा में संदिग्ध दवाएं लेकर पिछले दरवाजे से भाग गए। इनको एसटीएफ ने गाजियाबाद में पकड़ा है। इन्होंने बताया कि सरकारी अस्पताल से चोरी की दवाएं मोहित गुप्ता, महादेव गुप्ता से बिना बिल के सस्ते दामों पर अवैध रूप से खरीदते थे। इन पर केमिकल से नॉट फॉर सेल मिटाकर मनमानी एमआरपी अंकित कर बाजार में बिना बिल के बेचते थे।
पुराने बिलों का अवैध इस्तेमाल
वीए मेडिकोज की जांच में नामी कंपनियों की जार्डियंस, ग्लूकोनॉर्म पीजी (मधुमेह), टेल्मा (हाइपरटेंशन) और थायरॉक्स (हार्मोन्स) की दवाओं का भंडारण मिला। संचालक शोभित अग्रवाल बिल प्रस्तुत नहीं कर सके। जांच में इन दवाओं के रीलेबलिंग की गई। सुरक्षा जांच में टेल्मा यूवी लाइट रिफ्लेक्ट नहीं हुई। इससे ये नकली की पुष्टि हुई। शोभित अग्रवाल ने वीए मेडिकोज से दवाएं हर्षित ट्रेडर्स ने बिना बिल के दी थीं, जबकि नकली दवाओं के चलते 16 जून को हर्षित ट्रेडर्स का लाइसेंस निरस्त हो चुका था। इस तरह पुराने बिलों का अवैध इस्तेमाल कर 1.80 लाख रुपये की दवाओं की कागजी बिलिंग की। उसने पूर्व में विभोर मेडिकल एजेंसी के प्रो. संजीव गुप्ता से बिना बिल के नकली चाइमोरल फोर्टे दवाएं कम दाम में खरीदी थी। कानूनी जांच से बचने के लिए अपने लैपटॉप को ट्रक के नीचे रखकर नष्ट कर दिया। रुद्रा एंटरप्राइजेज के मोहित बंसल और श्री भगवती मेडिकल एजेंसी मथुरा की आपसी मिलीभगत कर एक-दो मई को फर्जी बिल काटे, जबकि उस पते पर मथुरा की फर्म को लाइसेंस 20 मई को जारी किया था। इन सभी के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है।