कमेटी ने निरीक्षण के दाैरान मुरैना में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध खनन को देखा। इन स्थलों पर व्यापक खुदाई के निशान मिले, जिनमें गहरे और चौड़े गड्ढे थे, जो बड़े पैमाने पर मशीनीकृत खनन का संकेत देते हैं। अवैध खनन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कई निकास मार्ग भी दिखाई दे रहे थे, जिन पर टायरों के ताजे निशान थे।
राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुअरी क्षेत्र में सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी को निरीक्षण के दौरान अवैध खनन के निशान मिले। चंबल नदी और इसके किनारे 10 से 20 फीट गहरे गड्ढे हो गए हैं, जिनमें घड़ियाल, कछुओं, इंडियन स्किमर और डॉल्फिन जैसी प्रजातियों के सामने प्रजनन का संकट है। यह खुलासा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर निरीक्षण के लिए आई सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में किया है।
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सुप्रीम कोर्ट में कमेटी ने अपनी सिफारिशों के साथ रिपोर्ट दाखिल की है। 11 मई को सुप्रीम कोर्ट इसी मामले में सीईसी की रिपोर्ट पर महत्वपूर्ण सुनवाई करेगा। सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी के सदस्य चंद्र प्रकाश गोयल ने वन विभाग के अधिकारियों के साथ राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैली चंबल सेंक्चुअरी का 30 अप्रैल और एक मई को निरीक्षण किया था।
उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अवैध खनन संगठित समूहों के जरिये ट्रैक्टर, ट्रॉली और भारी मशीनरी का उपयोग कर किया जाता है और अक्सर रात के समय इसे अंजाम दिया जाता है ताकि पकड़े जाने से बचा जा सके। इससे गंभीर पारिस्थितिक परिणाम हुए हैं, जिनमें घड़ियालों और कछुओं के घोंसले नष्ट होना, नदी के प्रवाह और संरचना में गड़बड़ी, नदी के किनारों का कटाव और जलीय आवासों का क्षरण शामिल है। शोर, मानवीय हस्तक्षेप और मशीनीकृत खनन से संवेदनशील प्रजातियों के प्रजनन चक्र भी बाधित होते हैं।
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मुरैना में पाया बड़े पैमाने पर अवैध खनन
सीपी गोयल ने रिपोर्ट में कहा है कि उन्होंने चंबल नदी के किनारे, विशेष रूप से मुरैना में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध खनन को देखा। इन स्थलों पर व्यापक खुदाई के निशान मिले, जिनमें गहरे और चौड़े गड्ढे थे, जो बड़े पैमाने पर मशीनीकृत खनन का संकेत देते हैं। अवैध खनन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कई निकास मार्ग भी दिखाई दे रहे थे, जिन पर टायरों के ताजे निशान थे। स्थल निरीक्षण के दौरान उन्हें धौलपुर और मुरैना में लगभग सभी ट्रैक्टर और ट्रॉलियां बिना नंबर प्लेट के मिलीं। इन पर कहीं भी पंजीकरण संख्या प्रदर्शित नहीं थी। उन्होंने इसे प्रवर्तन अधिकारियों की विफलता बताया है, जिससे अवैध खनन और परिवहन को बढ़ावा मिला है।
कमेटी की सिफारिशें तार-तार
कमेटी ने रिपोर्ट में कहा कि एनजीटी के आदेश पर बनी संयुक्त समिति की सिफारिशों का पालन होना चाहिए था। कमेटी ने आरटीओ को सेंक्चुअरी क्षेत्र में बालू के अवैध खनन पर वाहनों को जब्त करने और पंजीकरण रद्द करने के निर्देश दिए थे। इन वाहनों को पेट्रोल पंप डीजल-पेट्रोल न दें लेकिन चालान के कदम सतही हैं। खनन रोकने में विफल रहे हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश ने सार्थक कदम नहीं उठाए हैं। ये सभी ट्रैक्टर कृषि कार्य के लिए पंजीकृत हैं लेकिन रेत के परिवहन में शामिल होने पर जुर्माना, रजिस्ट्रेशन रद्द करने जैसे कदम नहीं उठाए गए।
अपशिष्ट पदार्थों से जलीय जीवों पर संकट
सीपी गोयल ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि निरीक्षण के दौरान चंबल पर बने पुल से भारी मात्रा में कचरा नदी में फेंका जा रहा था। जिस समय कचरा डाला गया, उस दौरान नदी में मगरमच्छ और घड़ियाल व घोंघे मौजूद थे। पुल के खंभों के आधार पर कचरा जमा हो गया है। यह नदी के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और चंबल राष्ट्रीय अभयारण्य के लिए एक गंभीर खतरा है। खनन के कारण पुल के स्तंभों के नीचे और आसपास खनन से गहरी गुफाएं बन गई हैं।
संवेदनशील घाट 40, कैमरा केवल एक
सीईसी की रिपोर्ट में बताया गया है कि निगरानी का दायरा नगण्य है। राजस्थान में 40 संवेदनशील घाट हैं लेकिन वहां केवल 1 सीसीटीवी कैमरा लगा है। उत्तर प्रदेश ने कई अंतरराज्यीय पारगमन मार्गों की पहचान की है, लेकिन वहां कोई स्थायी चेक-पोस्ट नहीं है। मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा हिंसा के बाद भी केवल 6 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। तीनों राज्यों ने स्वीकार किया कि अवैध खनन रोकने के लिए कोई एसओपी नहीं है। खनन परिवहन नेटवर्क में जीपीएस आधारित ट्रैकिंग नहीं है। मुरैना में 20,885 से अधिक पंजीकृत ट्रैक्टर हैं, जीपीएस इंस्टॉलेशन नहीं हैं। कंट्रोल रूम केवल कागजों पर है।