तालाबों से अवैध कब्जे हटाने में लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार ही नहीं, उच्च अधिकारी भी लापरवाह हैं। कब्जेदारों के विरुद्ध बेदखली के मुकदमों में ठोस पैरवी नहीं हो रही है। 60 से अधिक मामले अधर में लटके हैं। जिन मुकदमों में बेदखली के आदेश हुए उन आदेशों पर भी अमल कराने में राजस्व विभाग नाकाम रहा।
जिले में 3747 तालाब हैं। जिनमें 139 तालाबों पर कब्जे हैं। अकेले बाह तहसील क्षेत्र में 28 तालाबों की 3.6400 हेक्टेयर जमीन घेर ली गई। जिनमें पांच तालाब ऐसे हैं जहां स्थायी प्रकृति के पक्के निर्माण हो चुके हैं। इनके विरुद्ध राजस्व संहित की धारा 67/122 बी के तहत मुकदमे तहसीलों में विचाराधीन हैं।
इन मुकदमों में प्रशासन की लचर पैरवी का फायदा कब्जेदारों को हो रहा है। इसका खामियाजा ग्राम सभाएं भुगत रही हैं। तालाबों पर कब्जे नहीं हटने से जल संरक्षण नहीं हो रहा, दूसरी तरफ ग्राम सभा भूमि का रकबा नहीं बढ़ रहा। सदर तहसील में 60 और एत्मादपुर तहसील में 14 तालाबों पर कब्जा करने वालों के विरुद्ध मुकदमे लंबित हैं। जिनमें पैरवी नहीं हो रही।