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अवैध असलाह: पूर्व में भी गिरफ्त में आते रहे तस्कर, लेकिन नहीं रुकी तस्करी

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अवैध असलहों के तस्करी के गोरखधंधे का पर्दाफाश होने के बाद तस्करों के पूरे नेटवर्क को खंगालने की जरूरत दिख रही है। इससे पूर्व भी कई बार अवैध असलहों के तस्कर गिरफ्तार किए जाते रहे हैं लेकिन तब भी असलहों की तस्करी नहीं रुक सकी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर तस्करों के हौसले कैसे बुलंद हैं।
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यह मुख्य तीन मामले
1. पहला मामला : 15 जनवरी को पुलिस ने अमांपुर क्षेत्र के गांव करसना के बाग से अवैध शस्त्र बनाने की फैक्टरी पकड़ी थी, यहां से अवैध असलहों के तस्कर नेकसे, रिंकू, सर्वेश, प्रदीप को गिरफ्तार कर किया था। यहां से एक रायफल, एक बंदूक, दो तमंचे कारतूस, अर्धनर्मित 15 तमंचे बरामद हुए थे।
2. दूसरा मामला : सितंबर 2020 में जब गंजडुंडवारा पुलिस ने गंगा की खादर में छापा मारकर शस्त्र फैक्टरी पकड़ी। यहां से असलहा तस्कर मुनेश व अवधेश को गिरफ्तार किया गया था। यहां पांच बने तमंचे , 20 अर्ध निर्मित तमंचे और तमंचा बनाने के उपकरण बरामद हुए। यह शस्त्र आरोपियों ने जनपद के बाहर तस्करी करनी बात स्वीकारी।
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3. तीसरा मामला : वर्ष 2017 के दिसंबर माह में भरगैन माह पर झाड़ियों में अवैध शस्त्र फैक्टरी संचालित थी। यहां पुलिस ने छापा मारकर फर्रुखाबाद का कल्लू, जैथरा एटा का करू गिरफ्तार हुआ, जबकि कुछ आरोपी भाग गए। यह भी अंतर्जनपदीय अवैध तस्कर गिरोह था। यहां से दो देशी रायफल, शस्त्र बनाने के उपकरण बरामद हुए।
नहीं सुलझ रही ‘चचा’की पहेली
असलहों की तस्करी के मास्टर माइंड भरगैन का ‘चचा ’ बताया गया है। चचा कौन है पुलिस को 24 घंटे बाद भी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। अब पुलिस ‘चचा’ की पहेली की सुलझाने में जुटी हुई है। लेकिन अभी तक चचा का चेहरा पुलिस के सामने नहीं आ पाया है।
वर्जन:
असलहों की तस्करी के मामले की जांच की जा रही है। आरोपियों की पूछताछ में जो जानकारियां मिली थी कि उन पर काम किया जा रहा हैैैै। - गवेंद्र गौतम, सीओ पटियाली।
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