कासगंज के सोरों का वट वृक्ष जो विरासत वृक्ष के रूप में हैं संरक्षित।
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पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाए जा रहे कदम सार्थकता की ओर बढ़ रहे हैं। अब तक चिह्नित किए जा चुके छह वृक्षों की विरासत सहेजने को शासन स्तर से अधिसूचना जारी हो चुकी है। लेकिन जिले में कुछ और भी प्राचीन वृक्ष अभी छिपे होने की संभावना है। ऐसे में वन विभाग ने फिर से एक मुहिम छेड़ी है। जनमानस द्वारा यदि प्राचीन वृक्षों के बारे में वन विभाग को जानकारी दी जाएगी तो विभाग निकाय या पंचायत विभाग से सहयोग मांगकर प्राचीन वृक्षों का फिर चिह्नीकरण करेगा और प्रस्ताव पास कराएगा।
शासन ने प्राचीन वृक्षों को संरक्षित करने के लिए विशेष अभियान चलाया हुआ है। वन विभाग को जिम्मेदारी दी है कि वह सौ वर्ष से अधिक प्राचीन वृक्षों को चिह्नित कर उन्हें विरासत वृक्षों के रूप में सहेजे। वन विभाग अब तक छह वृक्षों को विरासत वृक्ष के रूप में चिह्नित कर चुका है, जिसकी अधिसूचना भी लखनऊ से जारी हो चुकी है। इस बीच वन विभाग को जानकारी मिली है कि और भी प्राचीन वृक्ष जनपद में हो सकते हैं। वन विभाग ने सभी विभागों के अतिरिक्त जन सामान्य से भी वृक्षों को तलाशने के लिए सहयोग मांगा है। विभाग इसके लिए चिह्नाकन के बाद अधिसूचना के लिए स्थानीय समिति से प्रस्ताव पास कराएगा।
एक वृक्ष का और मिला सुझाव
शाहपुर टहला गांव में एक वृक्ष बरगद का है। वन विभाग के सोशल ग्रुप पर विकास विभाग के अधिकारी रामायण सिंह ने सुझाव दिया है कि यह प्राचीन वृक्ष विरासत वृक्ष के रूप में चिह्नित किया जा सकता है। इस पर वन विभाग ने पंचायत राज विभाग से सहयोग मांगा है।
वर्जन:
सामान्य जनमानस प्राचीन वृक्षों की जानकारी जुटा सकते हैं। जानकरी मिलने पर यदि नगर क्षेत्र में वृक्ष है तो नगर निकाय से यदि ग्रामीण क्षेत्र में है तो पंचायती राज विभाग से सहयोग मांगकर चिन्हांकन कराया जाएगा और अधिसूचना के लिए प्रस्ताव पास कराया जाएगा। - दिवाकर वशिष्ठ, डीएफओ।