बिल्डरों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो जाने पर भी गिरफ्तारी के लिए कोशिश तक न किए जाने की शिकायतें मिलने पर आईजी रेंज ने आगरा और मथुरा पुलिस के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं।
ऐसे दो मामलों की जांच कराए जाने पर शिकायत सही मिली। इसके बाद आईजी ने जनवरी से अब तक बिल्डरों के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच की प्रगति आख्या दोनों जिलों के कप्तानों से सात नवंबर तक देने के निर्देश दिए हैं।
आगरा और मथुरा में बिल्डरों के खिलाफ 300 से अधिक केस दर्ज हैं। आगरा में अकेले निखिल होम्स के चेयरमैन शैलेंद्र अग्रवाल के खिलाफ 50 केस हैं। हालांकि शैलेंद्र ही अकेला ऐसा बिल्डर है जिसके खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की है।
गैंगस्टर भी लगाया, हिस्ट्रीशीट भी खोली और उसके फरार रहने के दौरान निर्भय नगर स्थित उसकी कोठी से चल संपत्ति की कुर्की भी की। अन्य बिल्डरों पर ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
'कुर्की कराएं, वारंट के लिए अर्जी दें'
आईजी ने थाना प्रभारी निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि जिन बिल्डरों के खिलाफ केस दर्ज हैं और साक्ष्य मौजूद हैं, उनकी गिरफ्तारी की जाए। इसके लिए कोर्ट में गैर जमानती वारंट के लिए अर्जी दी जाए। अगर वे हाथ नहीं आ रहे हैं तो उनकी संपत्ति की कुर्की की प्रक्रिया शुरू की जाए।
एफआईआर के लिए भी कोर्ट का सहारा
हरीपर्वत, सदर बाजार, न्यू आगरा थाना में बिल्डरों के खिलाफ 80 से अधिक केस दर्ज हैं। हरीपर्वत सर्किल में ही 70 केस हैं। दो महीने पहले की गई इनकी समीक्षा में पाया गया था कि बिल्डरों के खिलाफ तहरीर मिलने पर पुलिस रिपोर्ट भी दर्ज नहीं कर रही है। लोगों को कोर्ट का सहारा लेना पड़ रहा है। कोर्ट से आदेश होता है, तब केस दर्ज किया जाता है।
50 मुकदमों पर भी गिरफ्तारी नहीं
कल्पतरू बिल्डर के मालिक जय किशन राणा के खिलाफ आगरा और मथुरा में 50 केस दर्ज हैं। उसका पुलिस कोई सुराग तक नहीं लगा पा रही है। पीड़ित पुलिस दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। आरोप है कि इनसे प्लॉट और फ्लैट देने के नाम पर रकम ली और हड़प कर ली।
चार्जशीट तैयार, कोर्ट नहीं भेजी
खंदारी केराजीव नगर निवासी रामवीर सिंह ने मई 2018 में न्यू आगरा थाना में बिल्डर के खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कराया। पुलिस ने जांच में ढिलाई की तो फरवरी 2019 में सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा दी। रामवीर का कहना है कि इसके बाद उसके मोबाइल पर मैसेज आया कि चार्जशीट तैयार है। कोर्ट में मालूम किया तो पता चला कि चार्जशीट नहीं पहुंची है।