आईजी ए सतीश गणेश अधीनस्थों के साथ फरियादियों की फरियाद सुनते हुए
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शुरूआत में तो आईजी फरियादी बनकर ही पहुंचे थे। उस समय इंस्पेक्टर रामपाल भाटी अपनी कुर्सी पर थे, जबकि आईजी फरियादियों वाली सीट पर। जब मुकदमा दर्ज हो गया और आईजी जाने लगे तब रामपाल सिंह से हाथ मिलाया और कहा कि मैं आईजी हूं। यह सुनते ही थाने में सन्नाटा पसर गया। कुछ ही देर में थाने का सारा स्टाफ पहुंच गया।