आगरा। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया अंतिम चरण में है। नौ विधानसभा क्षेत्र में 36 लाख मतदाता थे। जिनमें 28 लाख मतदाताओं के फॉर्म डिजिटाइज्ड हो चुके हैं। 2003 की सूची से करीब आठ लाख मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो सकी। चार दिन शेष हैं। ऐसे में 2 लाख मतदाताओं की और मैपिंग हो सकती है। बाकी 6 लाख लोगों को नोटिस जारी करने की तैयारी शुरू हो गई है।
नौ विधानसभा क्षेत्रों में करीब 6 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी होंगे। उन्हें अगर वोट डालने का हक चाहिए तो दस्तावेज दिखाने होंगे। वरना, उनसे वोट डालने का हक छिन जाएगा। यह वह मतदाता हैं, जिन्होंने एसआईआर के गणना फॉर्म में 2003 का ब्योरा नहीं भरा है। ऐसे मतदाताओं को स्वयं के साथ, माता-पिता के दस्तावेज भी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे।
जिनके दस्तावेज वैध होंगे। उनकी नए सिरे से सूची में मैपिंग की जाएगी। उप जिला निर्वाचन अधिकारी यमुनाधर चौहान ने बताया कि नौ विधानसभा क्षेत्रों में 36 लाख मतदाता थे। जिनमें 15 प्रतिशत यानी कि 5.40 लाख मतदाता मृतक, अनुपस्थित, डुप्लीकेट और स्थानांतरित मिले हैं। जिनकी सूचियां बूथों पर चस्पा कर दी गई है। इनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से कट जाएंगे।
इनके अलावा करीब 8 प्रतिशत यानी 2.88 लाख मतदाता ऐसे हैं जिनका ब्योरा संदिग्ध है। इनके गणना फॉर्म भी जमा नहीं हुए हैं। करीब 28 लाख मतदाताओं ने गणना फॉर्म जमा किए हैं। जिनके फॉर्म डिजिटाइज्ड हो गए हैं। लेकिन, 2003 की सूची से 28 में 20 लाख मतदाताओं की मैपिंग हो सकी है। 11 दिसंबर तक मैपिंग और होगी। लगभग 6 लाख मतदाताओं का रिकाॅर्ड 2003 की मैपिंग से मेल नहीं खा रहा। ऐसे में इन सभी को 16 दिसंबर से नोटिस जारी किए जाएंगे। करीब 13 प्रकार के दस्तावेज आयोग ने तय किए हैं। नोटिस के जवाब में उन दस्तावेजों को प्रस्तुत करना होगा। तभी ऐसे मतदाताओं का नाम सूची में शामिल हो सकेगा।
इन दस्तावेजों से मिलेगा मताधिकार
- केंद्र या राज्य या सार्वजनिक उपक्रम का कर्मचारी, पेंशनभोगी पहचानपत्र, पेंशन भुगतान आदेश।
- 1 जुलाई 1987 से पहले सरकार, बैंक, डाकघर से जारी पहचानपत्र, प्रमाणपत्र या अभिलेख।
- सक्षम अधिकारी की ओर से जारी जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट या 10वीं कक्षा का शैक्षिक प्रमाणपत्र।
- सक्षम राज्य प्राधिकारी की ओर से जारी स्थायी निवास प्रमाणपत्र या अन्य अधिकार प्रमाणपत्र।
- तहसील से जारी ओबीसी, एससी, एसटी या कोई भी जाति प्रमाणपत्र, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर।
- राज्य या स्थानीय प्राधिकारी से जारी परिवार रजिस्टर, सरकार से आवंटित भूमि या मकान का आवंटन पत्र।
ये भी रखिए याद
- जिनका जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में हुआ है, उन्हें जन्मतिथि या जन्म स्थान का प्रमाण देना होगा।
- जिनका जन्म 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच हुआ है उन्हें जन्मतिथि या जन्म स्थान का प्रमाण देना होगा।
- जिनका जन्म 2 दिसंबर 2004 के बाद हुआ है वो स्वयं के अलावा पिता, माता की जन्मतिथि या जन्म स्थान का दस्तावेज देंगे।