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UP: आगरा के 49 ब्लैक स्पॉट...13 महीने में 139 ने गंवाई जान, कागजों में सिमट कर रह गए सड़क सुरक्षा के इंतजाम

Thu, 20 Feb 2025 12:01 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

कमिश्नरेट में 49 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं, जिन पर अक्सर हादसे होते हैं। इनमें 29 अकेले नेशनल हाईवे पर ही हैं। इसके अलावा 10 राज्य हाईवे, 1 एक्सप्रेस-वे और 9 जिले के अलग-अलग मार्ग पर हैं। इन ब्लैक स्पाॅट पर वर्ष 2021 में 340, 2022 में 408 व 2023 में 231 हादसे हुए। 
 
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सड़क हादसे में युमौत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नेशनल हाईवे से एक्सप्रेस-वे पर हादसों में लोगों की जान जा रही है। इसके बावजूद सुरक्षा के इंतजाम कागजों पर ही नजर आ रहे हैं। हर माह अधिकारियों की बैठकें भी खानापूर्ति ही साबित हो रही हैं। न रोड इंजीनियरिंग में बदलाव हो रहा है न ही वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लग पा रहा है। यही वजह है कि हादसों का ग्राफ कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
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दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे सिकंदरा, हरीपर्वत, न्यू आगरा, एत्माद्दाैला, ट्रांस यमुना और एत्मादपुर थाना क्षेत्र की सीमा में आता है। वहीं यमुना एक्सप्रेस-वे खंदाैली, एत्मादपुर और लखनऊ एक्सप्रेस-वे एत्मादपुर, डाैकी और फतेहाबाद थाना क्षेत्र में आता है। इनमें पिछले 13 महीने के इन थानों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 300 से अधिक हादसे हुए। इनमें 139 लोगों की माैत हो गई, जबकि 177 लोग घायल हो गए।


 

हादसे में बड़े वाहनों से टक्कर से जान अधिक लोगों की गई। हाल ही में ट्रांस यमुना क्षेत्र में हाईवे पर हादसा हुआ था। परीक्षा देने जा रहे बेटे और पिता की ट्रक से कुचलकर माैत हो गई थी। दो दिन पहले कालिंदी विहार में पिता-पुत्र को ट्रक ने कुचल दिया था। दोनों की जान चली गई थी। इससे पहले भी हादसों में जान जा चुकी हैं।

 

जिले में 49 ब्लैक स्पाॅट
पुलिस रिकाॅर्ड के मुताबिक, कमिश्नरेट में 49 ब्लैक स्पाॅट चिह्नित हैं, जिन पर अक्सर हादसे होते रहते हैं। इनमें 29 अकेले नेशनल हाईवे पर ही हैं। इसके अलावा 10 राज्य हाईवे, 2 एक्सप्रेस वे और जिले के 9 अलग-अलग मार्ग हैं। इन ब्लैक स्पाॅट पर हर बार सुरक्षा से लेकर रोड इंजीनियरिंग की खामियों को दूर करने को लेकर बैठकों में निर्देश दिए जाते हैं। वाहनों की रफ्तार से लेकर शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई के लिए कहा जाता है। मगर, इन निर्देशों को पालन नहीं होता है, जिससे हादसों का सिलसिला जारी है।

 

भारी वाहनों की आवाजाही से बढ़ी दुर्घटनाएं
अधिवक्ता केसी जैन ने बताया कि एनएच-19 पर भारी वाहनों की आवाजाही के कारण जाम, प्रदूषण और सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। इस समस्या का समाधान करने और गैर-आगरा गंतव्य वाले वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश से रोकने के लिए कई उपायों की योजना बनाई गई थी। 12.67 किलोमीटर उत्तरी बाईपास, रिंग रोड को शीघ्र पूरा कर यातायात को शहर से बाहर भेजा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली को लेकर दिए आदेश की तर्ज पर गैर आगरा गंतव्य वाले भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। प्रशासन सख्त प्रवर्तन और निगरानी सुनिश्चित करे, जिससे शहर सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त हो सके।

 
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ये हैं समाधान
- राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण 12.67 किलोमीटर लंबे उत्तरी बाईपास का निर्माण कर रहा है। यह एनएच-19 के किलोमीटर 174.500 से शुरू होकर यमुना एक्सप्रेस-वे के किलोमीटर 141.0 तक फैला होगा। अब तक 82.72% कार्य पूरा हो चुका है। इससे कानपुर से दिल्ली या कोलकाता की ओर जाने वाले भारी वाहन शहर में प्रवेश किए बिना यात्रा पूरी कर सकेंगे। यह एनएच-19 को यमुना एक्सप्रेस-वे से जोड़ेगा।
- ग्वालियर की ओर जाने वाले भारी वाहन आगरा शहर के अंदर से गुजरते हैं, जिससे यातायात दबाव और दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ती है। इन वाहनों को दक्षिणी बाईपास के माध्यम से एनएच-44 (ग्वालियर रोड) की ओर मोड़ा जाए।
- आगरा रिंग रोड का विकास तीन चरणों में किया जा रहा है। पहले में एनएच-19 से फतेहाबाद रोड तक (11 किमी), दूसरे में फतेहाबाद रोड से ड्योढ़ी रोड और तीसरे में ड्योढ़ी रोड से एनएच-21 (आगरा-ग्वालियर रोड) तक (7.77 किमी) होना है। इससे गैर-आगरा गंतव्य वाले भारी वाहन शहर के भीतर प्रवेश किए बिना अपनी यात्रा पूरी कर सकेंगे।
- हाथरस रोड और कानपुरी से आने वाले भारी वाहन कालिंदी विहार होकर एनएच-19 तक पहुंचते हैं, जिससे इस आवासीय क्षेत्र में यातायात और दुर्घटनाओं की समस्या बढ़ती है। इन वाहनों को यमुना एक्सप्रेस-वे से उत्तरी बाईपास के माध्यम से हाथरस रोड या मथुरा रोड की ओर मोड़ा जाए।
 
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