वर्ष 2024-25 में दलितों के खिलाफ हुए ज्यादातर अत्याचार के मामले फिरोजाबाद जिला सबसे आगे रहा। एससी, एसटी जाति के 711 व्यक्ति अत्याचार से पीड़ित हुए। वहीं मैनपुरी में सबसे कम मामले रहे।
अनुसूचित जाति व जनजातियों के प्रति होने वाली छूआछूत और अस्पृश्यता की भावना को खत्म करने के लिए सख्त कानून है। फिर भी अपराध कम नहीं हो रहे। मंडल में सुहाग नगरी में वर्ष 2024-25 में अनुसूचित जाति पर सबसे ज्यादा अत्याचार हुए। ये हम नहीं, आर्थिक सहायता देने वाली समाज कल्याण विभाग के आंकड़े कह रहे हैं।
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अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों को अत्याचार से पीड़ित होने पर एससी, एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाता है। नोडल विभाग समाज कल्याण की ओर से मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह को भेजी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 में आगरा मंडल में 589 मामलों में 711 व्यक्तियों पर अलग-अलग तरह से अत्याचार हुए। घटनाओं की प्रकृति के आधार पर 7.44 करोड़ रुपये की सहायता राशि आवंटित की गई। 31 जनवरी 2025 में 711 पीड़ितों में 606 पीड़ितों को आर्थिक मदद मिली।
सबसे ज्यादा 221 मामले फिरोजाबाद में सामने आए। जिनमें 259 एससी, एसटी जाति व्यक्ति पीड़ित थे। इनके लिए 2.35 करोड़ रुपये आवंटित हुए। 259 में 154 पीड़ितों को 2.07 करोड़ रुपये मिले। जबकि 85 मामलों में 106 पीड़ित ऐसे हैं जिन्हें 1.12 करोड़ रुपये मिलना शेष है। फिरोजाबाद को छोड़कर मंडल में बाकी जिले आगरा, मथुरा और मैनपुरी में कोई प्रकरण शेष नहीं। आगरा में 99 मामलों में 168 व्यक्ति, मथुरा में 115 मामलों में 164 पीड़ित और मैनपुरी में 85 मामलों में 120 एससी,एसटी व्यक्ति पीड़ित हुए थे।
85 हजार से 8.25 लाख तक मदद का प्रावधान
अनुसूचित जाति व जनजाति के अत्याचार पीड़ित व्यक्तियों को 85 हजार रुपये से लेकर 8.25 लाख रुपये तक आर्थिक सहायता का प्रावधान है। यह सहायता राशि अलग-अलग तरह की घटनाओं व प्रकृति के आधार पर दी जाती है। जिसका मकसद एससी एसटी वर्ग के प्रति हीन भावना को खत्म करना है। आर्थिक सहायता के लिए एफआईआर, मेडिकल, जाति प्रमाण पत्र, बैंक खाता आदि विवरण की जरूरत पड़ती है।