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Chaitra Navratri 2025: बन रहे कई शुभ योग...नौ शक्ति स्वरूपों की ऐसे करें आराधना, घट स्थापना का ये शुभ मुहूर्त

Sat, 29 Mar 2025 11:22 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

चैत्र नवरात्र की शुरुआत रविवार से हो रही है। इस बार नवरात्र में कई शुभ योग भी मन रहे हैं। जिसमें विधि-विधान से पूजा-अर्चना करना अति फलदायी साबित होगा। 
 
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नवरात्र को लेकर खरीदारी करते श्रद्धालु। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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रविवार को चैत्र नवरात्र प्रारंभ होने से कई शुभ योग बन रहे है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार नवरात्र में आठ दिन व्रत रखा जाएगा। भक्तों के लिए मां दुर्गा का पूजन अति फलदायी होगा। घट स्थापना का शुभ मुहुर्त सुबह 8:55 से 10:52 बजे तक है।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि रविवार को सुबह स्नान के बाद पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़क कर शुद्ध करें। चौकी पर माता की प्रतिमा को स्थापित करने के बाद गंगाजल से अभिषेक करें। नई पोशाक, चुनरी, आभूषण और पुष्पमाला धारण कराएं। केसर, चंदन, अक्षत से तिलक करें। लाल पुष्प, सिंदूर और शृंगार का सामान अर्पित करें। 

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माता के समक्ष घट स्थापित करें। मिट्टी के पात्र में जौ बोएं। दीप एवं धूप जलाकर श्री दुर्गा चालीसा एवं श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। माता के मंत्रों से यज्ञ करना चाहिए। अंत में माता की आरती करें और शुद्ध सात्विक चीजों का भोग अर्पित करें। प्रथम दिन माता को दूध, शुद्ध घी और ताजे फलों का भोग लगाना चाहिए। उन्होंने बताया कि नवरात्र में माता के मंत्रों का जाप करें और श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

 

ज्योतिषाचार्य डॉ. पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि नवरात्र में माता दुर्गा के नौ शक्ति स्वरूपों की आराधना की जाती है। पहला स्वरूप हैं मां शैलपुत्री। मां लाल चुनरी एवं साड़ी धारण करती हैं। शुद्धता तथा सरलता का प्रतीक है। द्वितीय माता ब्रह्मचारिणी हैं, जो पीले रंग के वस्त्र धारण करती हैं। शिक्षा और ब्रह्म ज्ञान प्रदान करती हैं। सफेद बर्फी, बताशे और सेब फल का भोग पसंद है।

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तृतीय माता चंद्रघंटा हैं, जो नारंगी रंग के वस्त्र धारण करती हैं। जीवन में उत्साह, प्रेम और खुशियां प्रदान करती हैं। शहद, केला, अंगूर का भोग अर्पित करें। चतुर्थ माता कुष्मांडा है। नीली साड़ी में सुशोभित हैं। सच्चाई और विश्वास बनाए रखती हैं। मालपुआ और नाशपाती का भोग अर्पित करना चाहिए।

 

पंचम स्कंदमाता हैं, जो पीले और लाल रंग की साड़ी धारण करती हैं। खुशी, ज्ञान और दीर्घायु प्रदान करती हैं। दूध, पीली बर्फी और ताजे फलों का भोग अर्पित करें। षष्ठम माता कात्यायनी हरे रंग की साड़ी में सुशोभित हैं। सुख-समृद्धि और ताजगी प्रदान करती हैं। शहद, अंगूर और अमरूद प्रिय हैं।

 

सप्तम मां कालरात्रि जीवन में संतुलन विजय एवं साहस प्रदान करती हैं। काले रंग के वस्त्र धारण करती हैं। मालपुआ, गुड़ और चीकू का भोग अर्पित करें। अष्टम माता महागौरी गुलाबी रंग की की साड़ी में शोभायमान हैं। आध्यात्मिकता, सरलता, सद्भाव और सात्विकता प्रदान करती हैं। नारियल, बर्फी और ताजे फल प्रिय हैं।

 
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नवम माता सिद्धिदात्री लाल लहंगा चुनरी धारण किए हैं। भौतिक एवं आध्यात्मिक सुख-समृद्धि प्रदान करती हैंं। नारियल, हलवा, पूरी, चना, अनार, केला, अंगूर आदि फलों का भोग प्रिय है।
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