फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जरूरत 18 हजार मीट्रिक टन डीएपी की, किसानों को बंट पाई 8500 मीट्रिक टन

विज्ञापन
विज्ञापन
कासगंज। गेहूं, मटर और आलू की बुवाई कर रहे किसानों को डीएपी खाद की जरूरत है। इस बुवाई सीजन के लिए जिले में करीब 18 हजार मीट्रिक टन खाद की जरूरत होती है, लेकिन इसके सापेक्ष बुवाई कार्य में लगे किसानों को केवल 8500 मीट्रिक टन खाद का वितरण हो सका है।
विज्ञापन

आलू और मटर की बुवाई का कार्य ज्यादातर किसान कर चुके हैं, लेकिन इस समय सर्वाधिक जरूरत गेहूं के किसानों को डीएपी की है। खाद की किल्लत पूरे माह से बनी हुई है। सहकारी समितियों पर नो स्टॉक की सूचनाएं सूचना पटों पर अंकित हैं। थोड़ी - थोड़ी मात्रा में डीएपी मिलती है तो वितरण के लिए किसानों की कतारें लग जाती हैं और आपाधापी का माहौल बन जाता है। लगातार किसान डीएपी के लिए परेशान हैं। जिले में खाद की कमी का मुख्य कारण है कि यहां रेलवे का रैक प्वाइंट छोटा है। जिसके कारण गुजरात से आने वाली खाद की रैक यहां नहीं लग पाती। चूंकि जो रैक खाद लेकर आती हैं उनमें बोगी अधिक होती हैं जो यहां रैक प्वाइंट पर नहीं लग पाती। जिसके कारण अन्य जनपदों में खाद की रैक लगती हैं तो पहले वहां का प्रशासन अपने जनपद के लिए खाद सुरक्षित करता है, उसके बाद इस जिले को खाद मिल पाती है। एक बार में पूरी आपूर्ति नहीं मिलती। अलग अलग जनपदों से खाद की यह आपूर्ति आती है। जिससे खाद का अभाव बना रहता है। जिले में 46 सहकारी समितियां संचालित हैं। जहां से किसानों को खाद का वितरण किया जाता है। इस समय कुछ समितियों पर खाद बिल्कुल नहीं है और कुछ समितियों पर खाद उपलब्ध है तो मात्रा कम में। ऐसी स्थिति में किसानों के बीच खाद को लेकर मारामारी रहती है और सहकारी समितियों पर हंगामा होता है। एक दिन पूर्व सहकारी समिति सुन्नगढ़ी पर खाद न मिलने से किसानों का काफी देर हंगामा चलता रहा। जिसका वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में समिति के सचिव सुरेंद्र शर्मा समिति के गोदाम की छत से किसानों से बात करते नजर आए और सचिव और किसानों के बीच नोंकझोंक होती रही।
जिले में अब तक साढ़े आठ हजार मीट्रिक टन खाद का वितरण हो चुका है। ढाई हजार मीट्रिक टन खाद की और उपलब्धता है। जिसका वितरण चल रहा है। रैक लगते ही और खाद मिलेगी - सुमित चौहान, जिला कृषि अधिकारी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें