आगरा के आवास विकास परिषद में अफसरों व दलालों के गठजोड़ से सिकंदरा योजना में आवंटित भूखंडों में फर्जी खरीद-फरोख्त का खेल चल रहा है। मूल आवंटियों को 30 साल बाद भी घर नहीं मिले। उनकी जगह फर्जी आवंटियों के कब्जे हो गए। डीएम, एसएसपी से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत के बाद भी न सुनवाई हो रही, न दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई।
आवास विकास परिषद के संपत्ति प्रबंधक अखिलेश मिश्रा ने बताया कि आवंटन में फर्जीवाड़े की अब कोई शिकायत लंबित नहीं हैं। सभी मामलों का निस्तारण हो चुका है। पूर्व में संपत्ति प्रबंधक के समय के मामले हैं। दफ्तर में दलालों के आने पर रोक है।
लंगड़े की चौकी, नगला छिद्दा निवासी सुंदर लाल को 1992 में परिषद ने सेक्टर-4 में भूखंड आवंटित किया। 30 हजार रुपये जमा कराए। भूखंड पर कब्जा मिल गया। 1997 में सुंदरलाल की मृत्यु हो गई। परिषद के अफसर व दलालों ने कूटरचित दस्तावेज से मृतक की फर्जी वसीयत से भूखंड जावेद को बेच दिया। सुंदर लाल की पत्नी भगवान देवी ने डीएम, एसएसपी से शिकायत दर्ज कराई। भूखंड तो मिल गया, लेकिन दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई।
शाहगंज निवासी आरबी शर्मा के नाम 1999 में परिषद ने भूखंड आवंटित किया। फर्जी कूटरचित दस्तावेज से 2002 में भूखंड दोबारा बेच दिया। आवंटी के पुत्र नीरज ने थाना में मुकदमा दर्ज कराया। 20 साल बाद मामले में परिषद के संपत्ति अधिकारी, लेखाकार सहित 9 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। परिषद के अधिकारी व फर्जीवाड़े में शामिल दलालों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो सकी।