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फर्जीवाड़े का खेल: आगरा में अफसरों व दलालों ने बेच दिए मूल आवंटियों के भूखंड

Mon, 19 Sep 2022 08:01 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

आवास विकास परिषद में दुर्बल आय वर्ग के लिए आवंटित आवासों में बड़ी फर्जीवाड़ा किया गया। कूट रचित दस्तावेजों से खेल कर मूल आवंटियों के भूखंड बेच दिए गए।  
 
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आवास विकास परिषद। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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आगरा के आवास विकास परिषद में अफसरों व दलालों के गठजोड़ से सिकंदरा योजना में आवंटित भूखंडों में फर्जी खरीद-फरोख्त का खेल चल रहा है। मूल आवंटियों को 30 साल बाद भी घर नहीं मिले। उनकी जगह फर्जी आवंटियों के कब्जे हो गए। डीएम, एसएसपी से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत के बाद भी न सुनवाई हो रही, न दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई।

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उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद ने 1990 से 1999 तक दीनदयाल उपाध्याय पुरम आवासीय सिकंदरा योजना के तहत 10 हजार से अधिक भूखंड आवंटित किए। जिनमें बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के संकेत हैं। 30 साल बाद मामले खुल कर सामने आ रहे हैं। संपत्ति अधिकारी से लेकर लेखाकार, लिपिक और सहायकों के विरुद्ध मूल आवंटियों को आवंटित भूखंडों को बेचने के मामले में जांच चल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर मार्च 2022 में बिल्डरों को अवैध लाभ और परिषद को क्षति पहुंचाने की जांच कराई। जांच के बाद आवास आयुक्त अजय चौहान ने आगरा के संपत्ति प्रबंधक गंगाराम, लेखाकार दीपक राज सिरोही को निलंबित किया जा चुका है। कूट रचित दस्तावेजों से हुए फर्जी बैनामे के एक मामले में संपत्ति अधिकारी डीपी सिंह, लिपिक लाखन सिंह आदि के विरुद्ध पुलिस जांच कर रही है।


कोई शिकायत लंबित नहीं 

आवास विकास परिषद के संपत्ति प्रबंधक अखिलेश मिश्रा ने बताया कि आवंटन में फर्जीवाड़े की अब कोई शिकायत लंबित नहीं हैं। सभी मामलों का निस्तारण हो चुका है। पूर्व में संपत्ति प्रबंधक के समय के मामले हैं। दफ्तर में दलालों के आने पर रोक है। 

केस-एक
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फर्जी वसीयत से बेचा

लंगड़े की चौकी, नगला छिद्दा निवासी सुंदर लाल को 1992 में परिषद ने सेक्टर-4 में भूखंड आवंटित किया। 30 हजार रुपये जमा कराए। भूखंड पर कब्जा मिल गया। 1997 में सुंदरलाल की मृत्यु हो गई। परिषद के अफसर व दलालों ने कूटरचित दस्तावेज से मृतक की फर्जी वसीयत से भूखंड जावेद को बेच दिया। सुंदर लाल की पत्नी भगवान देवी ने डीएम, एसएसपी से शिकायत दर्ज कराई। भूखंड तो मिल गया, लेकिन दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई।

केस-दो 
20 साल बाद मुकदमा दर्ज

शाहगंज निवासी आरबी शर्मा के नाम 1999 में परिषद ने भूखंड आवंटित किया। फर्जी कूटरचित दस्तावेज से 2002 में भूखंड दोबारा बेच दिया। आवंटी के पुत्र नीरज ने थाना में मुकदमा दर्ज कराया। 20 साल बाद मामले में परिषद के संपत्ति अधिकारी, लेखाकार सहित 9 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। परिषद के अधिकारी व फर्जीवाड़े में शामिल दलालों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो सकी।

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