बटेश्वर मेला में मारवाड़ी घोड़ा दिलखुश आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। घोड़े की यह नस्ल ताकत, बुद्धिमत्ता एवं वफादारी के लिए जानी जाती है। 65 इंच ऊंचाई वाले घोड़े की खूबसूरती के पारखी कायल हैं।
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महाराणा प्रताप एवं उनके घोड़े चेतक के जोहर का हल्दी घाटी का युद्ध गवाह रहा है। चेतक काठियाबाड़ी (मारवाड़ी) नस्ल का घोड़ा था। बटेश्वर के मेला में शनिवार को चेतक के वंशज घोड़ा दिलखुश की रफ्तार का रोमांच देखने को मिला। प्रति घंटा 60 किमी से भी ज्यादा तेज दौड़ने वाले घोड़े को देखने के साथ ही लोग हल्दी घाटी के युद्ध से जुड़े इतिहास के पन्नों को कुरेदने लगे।
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मेला क्षेत्र में दिन भर दिलखुश की टापों की गूंज सुनाई दी। नृत्य के साथ उसके हैरतअंगेज करतब देखने के लिए पारखियों का दिन भर तांता लगा रहा। बटेश्वर मेले में तीन घोड़े लेकर पहुंचे सलेमपुर फिरोजाबाद के यदुवीर सिंह, राजेन्द्र सिंह के कैंप की मारवाड़ी घोड़ा दिलखुश शान है। उन्होंने बताया कि घोड़े की यह नस्ल ताकत, बुद्धिमत्ता एवं वफादारी के लिए जानी जाती है।
65 इंच ऊंचाई वाले घोड़े की खूबसूरती के पारखी कायल हैं। उसकी रफ्तार की खूबी के लोग दीवाने हैं। उन्होंने बताया कि दिलखुश 24 महीने का है, दांत नहीं निकले हैं। दिलखुश की रोजाना की खुराक में 8 लीटर दूध, 2 किलो चना एवं कॉम्प्लान शामिल है। ऊंचाई बढ़ाने के लिए दूध में घोल कर कॉम्प्लान पिलाते हैं।
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हर हफ्ते एक लीटर घी की खुराक दी जाती है। तेज दौड़ के दौरान कानों से बनने वाले चन्द्रमा के लोग मुरीद हुए बिना नहीं रहते। यदुवीर सिंह ने बताया कि दिलखुश की कीमत 51 लाख रुपये रखी है। उन्होंने दावा किया कि मेला में 31 लाख रुपये तक के खरीदार मौजूद हैं।