फिरोजाबाद के स्वशासीय मेडिकल कॉलेज में मानवीय संवेदनाएं उस समय तार-तार हो गईं, जब एचआईवी पॉजिटिव प्रसूता छह घंटे से ज्यादा स्ट्रेचर पर प्रसव पीड़ा से कराहती रही। मगर, स्टाफ ने प्रसव कराना तो दूर छह घंटों तक उसको छूआ तक नहीं। बुधवार रात की शिफ्ट में बदली ड्यूटी में एक आया ने उसका प्रसव कराया। प्रसव में हुई देरी के कारण नवजात शिशु की हालत बिगड़ गई। सोमवार को सुबह नवजात शिशु ने दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत और अस्पताल प्रशासन के इस व्यवहार पर परिजनों ने हंगामा किया।
कबरला में रहने वाली एक महिला की एचआईवी की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। जब गर्भ के नौ माह पूरे होने पर प्रसव पीड़ा उठी, तो परिजन महिला को मेडिकल कॉलेज के सौ शैय्या अस्पताल में रविवार को दोपहर तीन बजे ले गए। अस्पताल स्टाफ ने महिला की फाइल में एचआईवी पॉजिटिव रिपोर्ट देखी तो न कोई डॉक्टर हाथ लगाने को तैयार हुआ और न ही कोई स्टाफ नर्स ही महिला का प्रसव कराने को तैयार हुई। स्ट्रेचर पर लेटे ही प्रसूता घंटों तक दर्द के कारण तड़पती रही। आरोप है कि परिजनों ने स्टाफ को प्रसव कराने के लिए मिन्नतें की, मगर स्टाफ परिजनों से भी अभद्रता करने लगा।
परिजनों ने बताया कि रात में एचआईवी पॉजिटिव महिला का प्रसव तो करा दिया। मगर टांके नहीं लगाए। एचआईवी पॉजिटिव महिला के परिजनों को ही ट्यूब दे दिया। सौ शैय्या अस्पताल में समुचित उपचार न मिल पाने के कारण महिला तड़पती रही।
परिजनों का आरोप है कि महिला की शादी मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में हुई है। चूंकि पति मारपीट करता था, इसलिए महिला को मायका पक्ष अपने घर ले आया। डिलीवरी में ही घंटों महिला तड़पती रही। घंटों पीड़ा के बाद जन्मे नवजात ने भी दम तोड़ दिया।