मैनपुरी। जिले में एचआईवी पॉजिटिव पाए गए लोगों के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। मामला दूसरे जिले से जुड़ा होने के कारण अब आगे की कार्रवाई शासन स्तर से होनी की संभावना विभागीय अफसर जता रहे हैं।
जिले में जनवरी महीने में छह लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। इनमें एक परिवार में दंपती और बच्चा तथा दूसरे परिवार में दंपती इसकी चपेट में हैं। जानकारी के अनुसार मजदूर दंपती को एचआईवी फर्रुखाबाद के एक निजी अस्पताल की लापरवाही से हुआ है। निजी अस्पताल में महिला को संक्रमित रक्त चढ़ाने की बात सामने आई है। महिला से उसका बच्चा और पति को एचआईवी की चपेट में आए। मीडिया में मामला आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। अधिकारी से लेकर कर्मचारियों को कार्रवाई का डर सता रहा है। इस मामले में शासन ने स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट तलब की है। इसे स्वास्थ्य विभाग की ओर से भेज दिया गया है।
पीड़ितों को है मुआवजे का अधिकार
एचआईवी की चपेट में आया एक परिवार मजदूर वर्ग का है। वहीं दूसरा परिवार सामन्य वर्ग का है। दोनों ही परिवारों की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष पांडेय बताते हैं कि यह कृत्य लापरवाही की श्रेणी में आता है। ऐसे में पीड़ित संबंधित निजी अस्पताल के खिलाफ क्षतिकर अधिनियम के तहत उपभोक्ता फोरम में वाद दायर कर सकते हैं। फोरम में निजी अस्पताल प्रशासन के दोषी पाए जाने पर पीड़ितों को मुआवजा मिलेगा। निश्चित ही ऐसे मामले में मुआवजा की धनराशि काफी अधिक हो सकती है।